Last Updated on September 13, 2026 by अनुपम श्रीवास्तव
क्या आप अपना टिकट कैंसिल करने जा रहे हैं और यह सोच रहें हैं कि आपका पैसा कितना कटेगा?
बस यहीं पर मामला थोड़ा उलझ जाता है।
देखिये कन्फर्म टिकट का नियम अलग होता है, आरएसी का अलग, वेटिंग का अलग और तत्काल का अलग।
और अगर कोई ट्रेन खुद रेलवे ने ही रद्द कर दी है तो नियम फिर बदल जाता है।
2026 में कन्फर्म टिकट कैंसिल करने की समय-सीमा भी बदल गई है इसलिए पुराने 48, 12 और 4 घंटे वाले नियम को देखकर टिकट कैंसिल न करें।
अब यह समय-सीमा 72, 24 और 8 घंटे हो गई है।
इसलिए आप केवल यह देखकर टिकट कैंसिल मत कीजिए कि वह अभी कन्फर्म है या वेटिंग।
आपको यह भी देखना जरूरी है कि ट्रेन छूटने में कितना समय बचा है और टिकट आप अपनी तरफ से कैंसिल कर रहे हैं या रेलवे की तरफ से कोई परेशानी हुई है।
अगर आपकी मुख्य परेशानी वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने, चार्ट बनने या यात्रा करने को लेकर है तो पहले हमारी रेलवे वेटिंग टिकट के नियम वाली गाइड देखें।
यहाँ हम केवल टिकट कैंसिल करने और पैसा वापस मिलने के नियम को समझेंगे।
ध्यान दें: अगर टिकट कन्फर्म है तो यह देखें कि ट्रेन छूटने में कितना समय बाकी है। आरएसी या वेटिंग टिकट में 30 मिनट वाली सीमा बहुत जरूरी है। अगर कन्फर्म तत्काल टिकट है तो सामान्य कैंसिलेशन पर रिफंड नहीं मिलता है। वहीं ट्रेन रद्द हो गई है, 3 घंटे से ज्यादा लेट है, रास्ता बदल गया है या कोच की समस्या है तो पहले उस स्थिति का रिफंड या TDR वाला नियम देखें। |
ट्रेन टिकट रिफंड के नियम एक नजर में
ट्रेन टिकट कैंसिल करने पर आपको कितना पैसा वापस मिलेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके टिकट की स्थिति और ट्रेन छूटने में कितना समय बचा है।
नीचे दी गई टेबल से आप अपने टिकट का नियम आसानी से समझ सकते हैं।
| आपकी स्थिति | क्या नियम है? |
|---|---|
| कन्फर्म टिकट, 72 घंटे से ज्यादा पहले | क्लास के हिसाब से तय कैंसिलेशन चार्ज काटकर बाकी पैसा वापस मिलेगा। |
| कन्फर्म टिकट, 72 से 24 घंटे पहले | किराये का 25% काटा जाएगा। यह रकम तय न्यूनतम कैंसिलेशन चार्ज से कम नहीं होगी। |
| कन्फर्म टिकट, 24 से 8 घंटे पहले | किराये का 50% काटा जाएगा। यहाँ भी न्यूनतम कैंसिलेशन चार्ज लागू होगा। |
| कन्फर्म टिकट, 8 घंटे से कम समय बचा हो | सामान्य तरीके से टिकट कैंसिल करने पर रिफंड नहीं मिलेगा। |
| आरएसी या वेटिंग टिकट | ट्रेन के तय समय से 30 मिनट पहले तक टिकट कैंसिल करने पर क्लर्केज शुल्क काटकर बाकी पैसा वापस मिलता है। |
| कन्फर्म तत्काल टिकट | अगर आप अपनी तरफ से टिकट कैंसिल करते हैं तो सामान्यतः कोई रिफंड नहीं मिलता। |
| पूरा पीएनआर चार्ट बनने के बाद भी वेटिंग में हो | ऑनलाइन टिकट अपने आप कैंसिल हो जाता है। यात्रियों के नाम चार्ट से हटा दिए जाते हैं और क्लर्केज काटकर बाकी पैसा उसी खाते में वापस भेजा जाता है जिससे टिकट बुक किया गया था। |
| ट्रेन रेलवे ने रद्द कर दी हो | ई-टिकट में सामान्यतः पूरा पैसा अपने आप उसी खाते में वापस आ जाता है जिससे टिकट बुक किया गया था। इसके लिए टीडीआर भरने की जरूरत नहीं होती। |
| ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट हो और आप यात्रा न करें | साधारण तरीके से टिकट कैंसिल न करें। पूरा रिफंड पाने के लिए ट्रेन के आपके बोर्डिंग स्टेशन से वास्तव में रवाना होने से पहले टीडीआर भरना जरूरी है। |
ध्यान दें कि कन्फर्म टिकट के लिए पुराने 48, 12 और 4 घंटे वाले समय को 2026 में बदलकर 72, 24 और 8 घंटे कर दिया गया है।
RAC और वेटिंग टिकट के लिए 30 मिनट वाला नियम तथा पूरे पीएनआर के वेटिंग रह जाने पर अपने आप रिफंड की व्यवस्था IRCTC के मौजूदा नियमों में भी दी गई है।
इसे एक उदाहरण से समझें
मान लें आपकी ट्रेन शुक्रवार रात 8 बजे है और आपका टिकट कन्फर्म है।
अगर आप मंगलवार शाम से पहले टिकट कैंसिल करते हैं तो 72 घंटे से ज्यादा समय बचा है। इस दशा में आपकी क्लास के हिसाब से तय कैंसिलेशन चार्ज काटा जाएगा।
वहीं अगर आप गुरुवार रात टिकट कैंसिल करते हैं तो ट्रेन छूटने में 24 घंटे से भी कम समय बचा है तो इस दशा में किराये का 50% तक कट सकता है।
अगर ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट हो तो एक बात जरूर ध्यान रखें
मान लें आपकी ट्रेन रात 8 बजे की थी लेकिन अब वह रात 12 बजे आएगी और आपने यात्रा न करने का फैसला कर लिया।
ऐसी दशा में केवल टिकट कैंसिल कर देना सही तरीका नहीं है। पूरा रिफंड पाने के लिए ट्रेन के वास्तव में रवाना होने से पहले सही कारण चुनकर टीडीआर भरना जरूरी है।
कन्फर्म ट्रेन टिकट कैंसिल करने पर कितना पैसा कटता है?
अब मान लेते हैं आपकी टिकट कन्फर्म है और आप अपनी तरफ से यात्रा रद्द कर रहे हैं।
तो यहाँ सबसे जरूरी चीज है कि ट्रेन छूटने में अभी कितना समय बाकी है।
देखिये अगर 72 घंटे से ज्यादा समय बचा है तो किराये का कोई प्रतिशत नहीं कटता। इस दशा में टिकट की क्लास के हिसाब से तय कैंसिलेशन चार्ज काटा जाता है।
अगर ट्रेन छूटने में 72 से 24 घंटे का समय बचा है तो किराये का 25% काटा जाएगा।
वहीं 24 से 8 घंटे के बीच टिकट कैंसिल करने पर किराये का 50% कटेगा।
यहाँ पर एक बात ध्यान देने वाली है कि 25% या 50% से निकली रकम नीचे दिए गए न्यूनतम कैंसिलेशन चार्ज से कम नहीं हो सकती है।
ध्यान दें कि अगर ट्रेन छूटने में 8 घंटे से भी कम समय बचा है तो सामान्य रूप से कन्फर्म टिकट कैंसिल करने पर रिफंड नहीं मिलेगा।
कन्फर्म टिकट का न्यूनतम कैंसिलेशन चार्ज
| टिकट की क्लास | प्रति यात्री न्यूनतम चार्ज |
|---|---|
| एसी फर्स्ट / एग्जीक्यूटिव क्लास | ₹240 + लागू जीएसटी |
| फर्स्ट क्लास / एसी 2 टियर | ₹200 + लागू जीएसटी |
| एसी चेयर कार / एसी 3 टियर / एसी 3 इकोनॉमी | ₹180 + लागू जीएसटी |
| स्लीपर | ₹120 |
| सेकंड क्लास / 2S | ₹60 |
ये सभी चार्ज प्रति यात्री होते हैं यानी अगर एक ही पीएनआर पर चार लोगों की कन्फर्म टिकट है तो कैंसिलेशन चार्ज भी हर यात्री के हिसाब से ही लगेगा।
एसी क्लास में जीएसटी भी लगता है इसलिए हिसाब लगाते समय आपको जो रकम मिल रही है और IRCTC पर दिखाई देने वाली अंतिम कटौती में थोड़ा फर्क हो सकता है।
एक छोटा उदाहरण
मान लीजिए 3 एसी का किराया ₹1,500 है और आप ट्रेन चलने से 50 घंटे पहले टिकट कैंसिल करते हैं।
50 घंटे का समय 72 से 24 घंटे के बीच आता है। इसलिए यहाँ किराये का 25% कैंसिलेशन चार्ज लगेगा।
₹1,500 का 25% ₹375 होता है। यह 3 एसी के न्यूनतम ₹180 से ज्यादा है, इसलिए यहाँ ₹375 के हिसाब से कटौती होगी।
वहीँ एसी टिकट होने के कारण लागू जीएसटी भी जुड़ सकता है।
अब मान लें किसी टिकट पर 25% की रकम केवल ₹150 बनती है, जबकि उस क्लास का न्यूनतम कैंसिलेशन चार्ज ₹180 है।
इस दशा में ₹150 नहीं बल्कि कम से कम ₹180 और लागू जीएसटी काटा जाएगा।
यही जरूरी बात कई लोगों को टिकट कैंसिल करते समय समझ में नहीं आती है।
आरएसी टिकट कैंसिल करने पर कितना रिफंड मिलता है?
देखिये आरएसी टिकट पर आप यात्रा कर सकते हैं, लेकिन अगर आपको यात्रा नहीं करनी है तो इसे साधारण कन्फर्म टिकट समझकर 72/24/8 वाली गणना मत कीजिए।
आईआरसीटीसी के मौजूदा नियम के अनुसार आरएसी टिकट को ट्रेन के तय समय से 30 मिनट पहले तक भी कैंसिल किया जा सकता है।
इसमें किराये से ₹60 प्रति यात्री क्लर्केज काटकर बाकी पैसा वापस किया जाता है और एसी श्रेणी में इस रकम पर जीएसटी भी लग सकता है।
मान लीजिए आपके परिवार में तीन लोगों का टिकट है और तीनों का स्टेटस आरएसी है।
अगर यात्रियों को यात्रा नहीं करनी है तो ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले वाली सीमा का खास ध्यान रखें।
अगर आरएसी टिकट कन्फर्म हो जाए तो?
मान लें कि अगर आरएसी टिकट चार्ट बनने से पहले कन्फर्म हो जाती है तो फिर उसे आरएसी नहीं माना जाएगा।
तो टिकट कैंसिल करते समय टिकट की मौजूदा स्थिति जरूर देखिए। अगर वह कन्फर्म हो चुकी है तो कन्फर्म टिकट वाला कैंसिलेशन नियम लागू होगा।
वेटिंग टिकट कैंसिल करने पर कितना रिफंड मिलेगा?
वेटिंग टिकट में दो अलग स्थितियाँ हैं और यहीं लोग सबसे ज्यादा गलती करते हैं।
1. पूरा पीएनआर वेटिंग में है
अगर आईआरसीटीसी ई-टिकट में एक ही पीएनआर के सभी यात्री चार्ट बनने के बाद भी वेटिंग में रह जाते हैं, तो उनके नाम आरक्षण चार्ट से हटा दिए जाते हैं।
ऐसी टिकट पर यात्रा नहीं की जा सकती और रिफंड की प्रक्रिया आईआरसीटीसी की तरफ से अपने आप शुरू हो जाती है।
यहाँ पर एक बात ध्यान रखें।
अपने आप रिफंड मिलने का मतलब यह नहीं है कि बुकिंग के समय दी गई पूरी रकम बिना कटौती के वापस आएगी। यहाँ लागू क्लर्केज काटा जा सकता है।
2. एक ही पीएनआर में कुछ कन्फर्म और कुछ वेटिंग हैं
अब मान लें कि एक ही पीएनआर में चार यात्री हैं।
यहाँ पर दो टिकट कन्फर्म हैं, एक आरएसी है और एक वेटिंग में है।
यह पूरा वेटिंग पीएनआर नहीं है। इसलिए यह मान लेना ठीक नहीं कि वेटिंग वाले यात्री का पैसा अपने आप वापस आ जाएगा।
अगर पूरा परिवार यात्रा नहीं करेगा
अगर एक ही पीएनआर में कुछ टिकट कन्फर्म और कुछ आरएसी या वेटिंग में हैं और कोई भी यात्री यात्रा नहीं करेगा तो नियम अलग है।
आईआरसीटीसी की उपलब्ध रिफंड जानकारी के अनुसार पूरे टिकट को ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक कैंसिल करना या उस समय सीमा के भीतर जरूरी दावा करना होता है।
ऐसी दशा में क्लर्केज काटकर कन्फर्म यात्रियों का किराया भी वापस मिल सकता है।
अगर कन्फर्म यात्री जा रहे हैं, लेकिन वेटिंग वाला नहीं जाएगा
यह स्थिति थोड़ी अलग है।
आईआरसीटीसी की मौजूदा रिफंड वाली जानकारी में ऐसे मामले के लिए टिकट चेकिंग स्टाफ से प्रमाण लेने और उसके आधार पर रिफंड का दावा करने की प्रक्रिया दी गई है।
इसलिए मिले-जुले पीएनआर में यह सोचकर टिकट को छोड़ न दें कि वेटिंग यात्री का पैसा अपने आप आ जाएगा।
2026 में TDR को लेकर एक जरूरी बात
मार्च 2026 में रेल मंत्रालय ने ई-टिकट के लिए TDR की जरूरत हटाने और रिफंड कि प्रक्रिया को आसान करने की घोषणा की थी।
लेकिन सितंबर 2026 तक आईआरसीटीसी की उपलब्ध रिफंड जानकारी में कुछ खास मामलों के लिए TDR की प्रक्रिया अभी भी दी हुई है।
इसमें मिले-जुले पीएनआर और कुछ यात्रा न करने वाले मामलों का भी जिक्र है।
इसलिए ऐसे मामले में किसी पुराने ब्लॉग या वीडियो पर भरोसा करने के बजाय आईआरसीटीसी ऐप या वेबसाइट में अपनी टिकट के सामने जो मौजूदा विकल्प दिख रहा है, उसी के अनुसार समय रहते कार्रवाई करें।
अगर आपको GNWL, RLWL,PQWLऔर TQWL का फर्क समझना हो तो वेटिंग लिस्ट के प्रकार पढ़ सकते हैं।
क्या तत्काल टिकट कैंसिल करने पर रिफंड मिलेगा?
आप कहेंगे कि तत्काल टिकट है तो क्या कुछ पैसा वापस मिल सकता है?
देखिये अगर आपका तत्काल टिकट कन्फर्म है और आप अपनी तरफ से उसे कैंसिल करते हैं तो सामान्य स्थिति में कोई रिफंड नहीं मिलता है।
यही सबसे सीधा नियम है।
लेकिन तत्काल में टिकट आरएसी या वेटिंग हो तो उसे कन्फर्म तत्काल जैसा मत समझिए।
ऐसे टिकट पर आरएसी और वेटिंग वाले कैंसिलेशन नियम लागू होते हैं।
अब मान लें कि ट्रेन रेलवे ने ही रद्द कर दी या ट्रेन आपके स्टेशन पर 3 घंटे से ज्यादा लेट है और आप यात्रा नहीं कर रहे हैं।
ऐसी स्थिति में सामान्य तत्काल कैंसिलेशन वाला नियम नहीं देखा जाएगा क्योंकि यहाँ अलग रिफंड नियम लागू हो सकते हैं।
इसी तरह ट्रेन का रास्ता बदल जाए या रेलवे आपको बुक की गई सुविधा न दे पाए, तब भी मामला अलग हो सकता है।
इसलिए “तत्काल टिकट में कभी भी रिफंड नहीं मिलता” कहना सही नहीं है।
सही बात यह है कि अपनी तरफ से कन्फर्म तत्काल टिकट कैंसिल करने पर सामान्यतः रिफंड नहीं मिलता।
क्या एक पीएनआर में केवल एक यात्री की टिकट कैंसिल कर सकते हैं?
जी हाँ। अगर एक ही पीएनआर पर चार लोगों की टिकट है और उनमें से केवल एक व्यक्ति को यात्रा नहीं करनी है तो केवल उसी यात्री की टिकट कैंसिल की जा सकती है।
आईआरसीटीसी में Booked Ticket History खोलें और पीएनआर चुनने के बाद जिस यात्री की टिकट कैंसिल करनी है केवल उसके नाम को चुनें।
मान लें एक परिवार में माता, पिता और दो बच्चों की टिकट है और बाद में पिता को यात्रा नहीं करनी है।
इस दशा में पूरे पीएनआर को कैंसिल करने की जरूरत नहीं है।
कैंसिलेशन के बाद बाकी यात्रियों की नई आरक्षण पर्ची जरूर देख लें।
आईआरसीटीसी भी आंशिक कैंसिलेशन के बाद नई ERS रखने की सलाह देता है।
यहाँ एक बात और ध्यान दें।
अगर चार्ट बन चुका है तो साधारण ऑनलाइन कैंसिलेशन का समय निकल सकता है तो ऐसी स्थिति में आपको जरूरत के अनुसार टीडीआर के नियम देखने पड़ेंगे।
ट्रेन रेलवे ने रद्द कर दी तो क्या टिकट खुद कैंसिल करना है?
अगर पूरी ट्रेन रेलवे की तरफ से रद्द कर दी गई है और आपकी कन्फर्म या आरएसी बुकिंग ई-टिकट है, तो सामान्यतः पूरा किराया उसी भुगतान माध्यम में अपने आप वापस किया जाता है जिससे टिकट बुक की गई थी।
ऐसी स्थिति में केवल रिफंड पाने के लिए आपको टीडीआर भरने की जरूरत नहीं होती।
मान लें आपकी ट्रेन लखनऊ से दिल्ली जाने वाली थी और रेलवे ने पूरी ट्रेन ही रद्द कर दी। अब आपको केवल इस डर से टीडीआर भरने की जरूरत नहीं है कि पैसा नहीं मिलेगा।
हाँ, काउंटर से ली गई टिकट का तरीका अलग है और ऐसी टिकट में आरक्षण काउंटर वाले नियम लागू होते हैं।
और यहाँ एक जरूरी फर्क समझिए।
ट्रेन का पूरी तरह रद्द होना, ट्रेन का रास्ता बदल जाना और ट्रेन का बीच रास्ते में समाप्त कर दिया जाना एक ही बात नहीं है।
इन तीनों में रिफंड का तरीका अलग हो सकता है।
ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट है और यात्रा नहीं करनी तो क्या करें?
यह छोटा सा नियम आपके हजारों रुपये बचा भी सकता है और एक छोटी गलती पर रिफंड रुक भी सकता है।
अगर ट्रेन आपके चढ़ने वाले स्टेशन पर तय समय से 3 घंटे से ज्यादा लेट है और आप यात्रा नहीं करते हैं, तो पूरे किराए के रिफंड का नियम है।
लेकिन ई-टिकट में एक बहुत जरूरी शर्त है।
आपको इस कारण का टीडीआर ट्रेन के आपके स्टेशन से वास्तविक रूप से रवाना होने से पहले भरना होगा।
इसे एक उदाहरण से समझिए।
मान लें कि आपकी ट्रेन शाम 6 बजे की थी लेकिन अब रात 10 बजे आने वाली है। आप तय करते हैं कि अब यात्रा नहीं करनी है।
इस दशा में केवल यह देखकर न बैठें कि ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट है इसलिए पैसा अपने आप वापस आ जाएगा।
अगर पूरा रिफंड चाहिए तो ट्रेन के आपके स्टेशन से वास्तव में रवाना होने से पहले टीडीआर भरना जरूरी है।
अगर ट्रेन निकल गई और उसके बाद आपने टीडीआर भरा तो इस कारण से पूरा रिफंड मिलने का दावा मान्य नहीं होगा।
यहाँ तय समय और वास्तविक रवाना होने का समय दोनों अलग चीजें हैं और इसी बात में सबसे ज्यादा गलती होती है।
एक और जरूरी बात
अगर एक ही पीएनआर पर कई यात्री हैं और 3 घंटे से ज्यादा लेट होने के कारण पूरा रिफंड लेना है तो नियम के अनुसार सभी यात्रियों ने यात्रा नहीं की होनी चाहिए।
इसलिए एक यात्री ट्रेन में चला गया और बाकी लोगों ने यात्रा नहीं की, तो इसे सीधे वही सामान्य “3 घंटे लेट वाला पूरा रिफंड” मामला न समझें।
यह गलती न करें अगर ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट है और आपको पूरा रिफंड चाहिए तो सीधे सामान्य Cancel Ticket वाला विकल्प न चुनें। आईआरसीटीसी में टीडीआर भरते समय “Train Late More Than Three Hours and Passenger Not Travelled” वाला कारण चुनें। यह दावा ट्रेन के आपके स्टेशन से वास्तविक रूप से रवाना होने से पहले भरना जरूरी है। मान लें ट्रेन शाम 6 बजे की थी और अब रात 10 बजे आने वाली है। अगर आपने यात्रा न करने का फैसला किया है तो ट्रेन वास्तव में स्टेशन से निकलने से पहले ही टीडीआर भर दें। सिर्फ टीडीआर का फॉर्म जमा हो जाना इस बात की गारंटी नहीं है कि आपको रिफंड मिल ही जाएगा। आईआरसीटीसी आपका दावा संबंधित रेलवे को भेजता है और अंतिम फैसला नियमों के अनुसार वहीं से होता है। |
ट्रेन का रास्ता बदल गया या ट्रेन मंजिल तक नहीं गई तो?
कई बार किसी कारण से ट्रेन का रास्ता बदल दिया जाता है। ऐसा भी हो सकता है कि ट्रेन आपके चढ़ने वाले स्टेशन या मंजिल वाले स्टेशन पर जाए ही नहीं।
तो ऐसी स्थिति में सामान्य टिकट कैंसिलेशन वाला नियम नहीं लगता है। आईआरसीटीसी में इसके लिए अलग-अलग टीडीआर कारण दिए गए हैं।
अब मान लें कि आपकी ट्रेन का रास्ता बदल गया और वह आपके स्टेशन पर आई ही नहीं तो इस दशा में टीडीआर भरते समय वही कारण चुनें जो वास्तव में आपके साथ हुआ है।
“ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट” और “ट्रेन का रास्ता बदला” दोनों अलग मामले हैं और केवल जल्दी रिफंड पाने के लिए गलत कारण चुनना ठीक नहीं है।
आईआरसीटीसी के अनुसार गलत दावा पाए जाने पर दावा अस्वीकार हो सकता है वहीँ गंभीर मामले में यूजर आईडी पर भी कार्रवाई भी हो सकती है।
ट्रेन का रास्ता बदलने और उसके आपके चढ़ने या उतरने वाले स्टेशन को न छूने पर टीडीआर की समय सीमा तय प्रस्थान समय से 72 घंटे तक दी गई है।
अगर ट्रेन बीच रास्ते में ही समाप्त कर दी गई और आपकी मंजिल तक नहीं पहुँची, तो टीडीआर मंजिल पर ट्रेन के तय पहुँचने के समय से 72 घंटे के भीतर भरना होता है।
मेरी सलाह है कि ऐसी स्थिति में रेलवे का संदेश और एनटीईएस पर दिखाई दे रही ट्रेन की स्थिति का स्क्रीनशॉट भी संभालकर रखें।
एसी खराब हो जाए तो क्या रिफंड मिलेगा?
मान लें आपने एसी कोच का टिकट लिया है लेकिन यात्रा के दौरान एसी काम ही नहीं कर रहा है।
ऐसी दशा में पूरे टिकट का रिफंड नहीं मिलता है।
आपको जितनी दूरी तक एसी की सुविधा नहीं मिली है उसके लिए नियम के अनुसार किराये का अंतर आपको वापस मिल सकता है।
इसके लिए टीडीआर को ट्रेन के आपकी मंजिल पर वास्तव में पहुँचने के 20 घंटे के भीतर भरना होता है।
यहाँ टिकट जांच कर्मचारी से मिला प्रमाण-पत्र भी जरूरी हो सकता है।
इसलिए आप केवल शिकायत करके न छोड़ें। अगर टीटीई कोई प्रमाण-पत्र देता है तो उसे संभालकर रखें।
बुकिंग ऊंची श्रेणी की थी पर निचली श्रेणी मिली तो?
यह स्थिति भी सामान्य टिकट कैंसिलेशन से अलग है।
मान लें कि आपका टिकट 2AC में था लेकिन रेलवे ने आपको 3AC में जगह दी और आपने उसी में यात्रा कर ली।
ऐसी दशा में दोनों श्रेणियों के किराये का अंतर आपको वापस मिल सकता है।
अगर निचली श्रेणी पहली चार्टिंग के समय ही दी गई है तो ई-टिकट में किराये का अंतर अपने आप वापस किया जा सकता है।
अगर निचली श्रेणी बाद में दी गई है तो आपको टीडीआर भरना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में टीटीई से मिला प्रमाण-पत्र बहुत जरूरी है।
वर्तमान आईआरसीटीसी नियम के अनुसार यह टीडीआर प्रमाण-पत्र जारी होने की तारीख को छोड़कर अगले 2 दिनों के भीतर भरना होता है।
निचली श्रेणी मिली और मैंने यात्रा ही नहीं की तो?
अब यहाँ दूसरी स्थिति देखें।
आपका टिकट 2AC का था लेकिन आपको निचली श्रेणी दी गई और आपने यात्रा करने से मना कर दिया।
ऐसे मामले के लिए आईआरसीटीसी में अलग टीडीआर कारण है।
यहाँ आपको अपना दावा ट्रेन के आपके चढ़ने वाले स्टेशन से वास्तव में निकलने के 3 घंटे के भीतर करना होता है।
यानी “निचली श्रेणी में यात्रा की” और “निचली श्रेणी मिलने के कारण यात्रा नहीं की” दोनों अलग मामले हैं।
यहाँ सही कारण चुनना बहुत जरूरी है।
कोच ही नहीं लगा या कोच खराब हो गया तो?
कभी ऐसा भी होता है कि जिस कोच में आपकी बुकिंग थी वह ट्रेन में लगा ही नहीं या किसी खराबी के कारण उसमें यात्रा करना संभव ही नहीं रहा।
अगर इसके कारण आपको निचली श्रेणी में यात्रा करनी पड़ी तो किराये के अंतर का दावा बन सकता है।
अगर कोच खराब होने के कारण आपने यात्रा ही नहीं की तो आईआरसीटीसी में उसके लिए अलग टीडीआर कारण दिया गया है। इसकी समय सीमा वास्तविक प्रस्थान से 3 घंटे तक है।
जहाँ टीटीई या रेलवे कर्मचारी से कोई प्रमाण-पत्र मिले, उसे संभालकर जरूर रखें।
अगर पहली ट्रेन लेट हुई और दूसरी ट्रेन छूट गई तो क्या रिफंड मिलेगा?
यह सवाल बहुत कम जगह साफ साफ लिखा मिलता है।
अगर ट्रेन मेरी गलती से छूट गई तो क्या रिफंड मिलेगा?
अब मान लें कि ट्रेन अपने समय पर चली गई लेकिन आप स्टेशन पर देर से पहुँचे।
इस स्थिति को “ट्रेन लेट” नहीं माना जाएगा क्योंकि यहाँ देरी आपकी तरफ से हुई है।
केवल ट्रेन छूट जाने से अलग से पूरे रिफंड का अधिकार नहीं बन जाता है। आपके टिकट पर अब सामान्य कैंसिलेशन और रिफंड के नियम ही लागू होंगे।
इसलिए अपनी देरी को टीडीआर में “ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट” या कोई दूसरा कारण दिखाकर दावा करना ठीक नहीं है।
आईआरसीटीसी साफ लिखता है कि गलत टीडीआर दावा पाए जाने पर कार्रवाई भी हो सकती है।
इसलिए टीडीआर में वही कारण चुनें जो वास्तव में आपके साथ हुआ है।
क्या काउंटर से ली गई टिकट ऑनलाइन कैंसिल हो सकती है?
जी हाँ, रेलवे काउंटर से ली गई कई टिकटों को ऑनलाइन भी कैंसिल किया जा सकता है।
इसके लिए टिकट बनवाते समय सही मोबाइल नंबर देना जरूरी है क्योंकि कैंसिलेशन के समय उसी नंबर पर OTP आता है।
टिकट कैंसिल होने के बाद मोबाइल पर मैसेज आता है जिसमें मिलने वाले रिफंड की जानकारी रहती है।
पर यहाँ एक बात ध्यान रखें। काउंटर टिकट का मामला ई-टिकट जैसा नहीं है जहाँ पैसा सीधे उसी खाते में वापस आ जाता है।
ऑनलाइन कैंसिल करने के बाद भी आपको मूल टिकट दिखाकर रेलवे के निर्धारित PRS काउंटर से रिफंड लेना पड़ सकता है।
कहाँ से और कब तक पैसा लेना है इसकी जानकारी कैंसिलेशन के समय मिलने वाले मैसेज में रहती है।
मार्च 2026 में रेलवे ने यह भी घोषणा की है कि आगे चलकर काउंटर टिकट किसी भी रेलवे स्टेशन से कैंसिल की जा सकेगी लेकिन इसे अभी हर जगह लागू मानकर न चलें।
इसलिए टिकट कैंसिल करते समय IRCTC पर दिख रहे निर्देश और मोबाइल पर आए मैसेज को जरूर पढ़ लें।
मान लें आपने दिल्ली से टिकट बनवाई लेकिन अब आप लखनऊ में हैं तो केवल यह सोचकर टिकट कैंसिल न करें कि रिफंड लखनऊ में ही मिल जाएगा।
आप पहले कैंसिलेशन के समय दिख रहे रिफंड निर्देश देख लें।
टिकट कैंसिल किया लेकिन पूरे पैसे वापस क्यों नहीं आए?
यह सवाल बहुत लोगों के मन में आता है।
मान लें आपने ₹1,000 की टिकट बुक की थी और कैंसिल करने के बाद ₹1,000 से कम पैसे वापस आए तो इसका मतलब यह नहीं कि रेलवे ने गलत रिफंड दिया है।
देखिए, टिकट का किराया और आपने बुकिंग के समय जो कुल पैसा दिया है वह दोनों हमेशा एक नहीं होते।
टिकट कैंसिल करने पर नियम के हिसाब से कैंसिलेशन चार्ज या क्लर्केज कट सकता है।
इसके अलावा IRCTC पर ई-टिकट की सफल बुकिंग के समय लिया गया सुविधा शुल्क भी सामान्य कैंसिलेशन में वापस नहीं मिलता है।
इसलिए अगर आपने ₹1,000 दिए थे तो यह जरूरी नहीं कि कैंसिलेशन के बाद आपके पूरे ₹1,000 ही वापस आएँ।
वेटिंग ई-टिकट में भी क्लर्केज कट सकता है। चार्ट बनने के बाद पूरा PNR वेटिंग में रह जाने पर टिकट अपने आप कैंसिल हो सकता है, लेकिन रिफंड से क्लर्केज काटा जाता है।
यही कारण है कि “टिकट अपने आप कैंसिल हुई तो पूरा पैसा वापस आएगा” वाली बात हर बार सही नहीं है।
पैसा कट गया लेकिन टिकट बनी ही नहीं तो क्या करें?
अब यह टिकट कैंसिल होने का मामला नहीं है।
मान लें आपने ₹2,000 का भुगतान किया और बैंक से पैसा कट गया लेकिन न PNR मिला और न टिकट बनी।
ऐसी स्थिति को असफल बुकिंग माना जाता है।
IRCTC के मौजूदा नियम के अनुसार अगर पैसा कट गया लेकिन टिकट जारी नहीं हुई तो पूरा किराया और IRCTC का सुविधा शुल्क वापस किया जाना चाहिए।
हाँ, बैंक या कार्ड से लिया गया लेन-देन शुल्क वापस न भी मिले, ऐसा हो सकता है।
इसलिए अगर टिकट बनी ही नहीं है तो उसे सामान्य कैंसिलेशन समझकर परेशान न हों।
सबसे पहले IRCTC में अपनी बुकिंग हिस्ट्री और असफल लेन-देन की जानकारी देखें।
कई बार भुगतान के समय पेज अटक जाता है और हमें लगता है कि टिकट नहीं बनी इसलिए दोबारा टिकट बुक करने से पहले यह जरूर देख लें कि पहली बुकिंग बाद में सफल तो नहीं हो गई।
अगर वहाँ टिकट नहीं है तो रिफंड बैंक और भुगतान प्रणाली की मिलान प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस आता है।
IRCTC खुद भी कहता है कि अलग-अलग बैंक और भुगतान माध्यम होने के कारण पैसा खाते में पहुँचने में समय लग सकता है।
IRCTC में रिफंड सफल है लेकिन बैंक में पैसा नहीं आया तो?
यह भी काफी आम परेशानी है।
IRCTC पर “Refund Successful” दिखने का मतलब यह है कि वहाँ से रिफंड की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
इसका यह मतलब नहीं कि उसी समय आपके बैंक खाते में भी पैसा दिखाई देने लगेगा।
बीच में बैंक या भुगतान माध्यम की प्रक्रिया भी होती है और इसमें थोड़ा समय लग सकता है।
सबसे पहले वही बैंक खाता, कार्ड या भुगतान माध्यम जाँचें जिससे टिकट बुक की गई थी।
मान लें आपने टिकट UPI से बुक की थी तो ऐसे में केवल अपने दूसरे बैंक खाते को देखकर यह न मान लें कि रिफंड नहीं आया।
उसी खाते और उसी लेन-देन को जाँचें जिससे भुगतान हुआ था।
IRCTC में रिफंड की स्थिति और उसका संदर्भ नंबर भी संभालकर रखें।
अगर काफी समय बीतने के बाद भी पैसा नहीं आया तो IRCTC की eQuery सेवा पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
ई-टिकट कैंसिल करने या TDR से जुड़ी परेशानी हो तो अपने रजिस्टर्ड ईमेल से etickets@irctc.co.in पर भी लिख सकते हैं।
IRCTC ने यही संपर्क अपनी मौजूदा सहायता जानकारी में दिया है।
टीडीआर क्या है और 2026 में इसका क्या हुआ?
टीडीआर (TDR) यानी टिकट डिपॉजिट रिसीट।
आसान भाषा में कहें तो यह ऐसे खास रिफंड मामलों के लिए है जहाँ केवल टिकट कैंसिल करने से काम नहीं चलता।
जैसे ट्रेन बहुत ज्यादा लेट हो, उसका रास्ता बदल जाए, आपका स्टेशन छूट जाए या चार्ट बनने के बाद कोई ऐसी स्थिति आए जिसमें सामान्य कैंसिलेशन नहीं हो सकता।
मार्च 2026 में रेल मंत्रालय ने घोषणा की थी कि ई-टिकट के लिए टीडीआर की जरूरत हटाई जाएगी और रिफंड की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा।
अब आप कहेंगे कि फिर टीडीआर की बात क्यों हो रही है?
देखिए, सितंबर 2026 तक आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर अभी भी कई खास मामलों में TDR भरने का विकल्प और उसके नियम दिए गए हैं।
इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि टीडीआर पूरी तरह बंद हो चुका है।
उदाहरण के लिए ट्रेन आपके स्टेशन पर 3 घंटे से ज्यादा लेट है और आप यात्रा नहीं करना चाहते हैं तो मौजूदा नियम में ट्रेन के असली प्रस्थान से पहले TDR भरने की शर्त दी गई है।
इसी तरह ट्रेन का रास्ता बदलने या आपके चढ़ने अथवा उतरने वाले स्टेशन पर ट्रेन न जाने जैसे मामलों के लिए भी IRCTC की मौजूदा सूची में TDR दिया गया है।
इसलिए मेरा सुझाव है कि केवल यह सुनकर न चलें कि TDR अब बंद हो चुका है।
जिस दिन आपका मामला बने, उस समय IRCTC वेबसाइट या ऐप में उपलब्ध विकल्प जरूर देखें।
अगर TDR का विकल्प दिया जा रहा है तो समय निकलने से पहले उसे भरें।
टीडीआर या रिफंड का दावा अस्वीकार हो गया तो क्या करें?
सबसे पहले यह देखें कि दावा अस्वीकार करने की वजह क्या बताई गई है।
TDR का अंतिम फैसला IRCTC नहीं बल्कि संबंधित जोनल रेलवे करता है।
वही यह तय करता है कि रिफंड मिलेगा या नहीं और अगर मिलेगा तो कितना मिलेगा।
अब मान लीजिए आपने ट्रेन के 3 घंटे से ज्यादा लेट होने का कारण चुना, लेकिन रेलवे के रिकॉर्ड में उस समय ट्रेन उतनी लेट नहीं थी।
ऐसी दशा में आपका दावा अटक सकता है।
इसीलिए TDR भरते समय कारण बहुत ध्यान से चुनें।
अपने पास पीएनआर, लेन-देन आईडी, ट्रेन नंबर, यात्रा की तारीख और रेलवे से मिले मैसेज जरूर रखें।
अगर ट्रेन लेट या डायवर्ट हुई थी तो उस समय का NTES स्क्रीनशॉट भी रख लेना बेहतर है।
अगर टीटीई या रेलवे कर्मचारी ने कोई प्रमाण-पत्र दिया है तो उसे भी संभालकर रखें। कुछ रिफंड मामलों में ऐसे प्रमाण की जरूरत पड़ सकती है।
शिकायत कहाँ करें?
अगर आपको ई-टिकट कैंसिल करने या TDR भरने में परेशानी आ रही है तो IRCTC की eQuery सुविधा का उपयोग किया जा सकता है।
IRCTC यह भी कहता है कि TDR या ई-टिकट कैंसिलेशन की समस्या में अपने रजिस्टर्ड ईमेल से etickets@irctc.co.in पर लिखा जा सकता है।
रेलवे से जुड़ी शिकायत के लिए RailMadad और 139 भी उपलब्ध हैं।
एक बात ध्यान रखें। टिकट बुकिंग और IRCTC खाते से जुड़ी सहायता के लिए IRCTC की मौजूदा हेल्पलाइन 14646 भी दी गई है।
एक जरूरी बात TDR भर देने का मतलब यह नहीं है कि रिफंड मिलना तय है। दावा संबंधित रेलवे के पास जाता है और रेलवे रिकॉर्ड देखने के बाद उसे स्वीकार या अस्वीकार किया जाता है। इसलिए सही कारण चुनना और समय-सीमा के अंदर दावा करना बहुत जरूरी है। |
विकल्प में दूसरी ट्रेन मिल गई, अब यात्रा नहीं करनी तो क्या करें?
अब मान लें कि आपने वेटिंग टिकट बुक करते समय विकल्प (VIKALP) चुना था और रेलवे ने आपको दूसरी ट्रेन में सीट दे दी।
तो क्या पहली ट्रेन की टिकट वेटिंग देखकर यह मान लें कि टिकट अपने आप कैंसिल हो जाएगी?
जी नहीं।
दूसरी ट्रेन में सीट मिलने के बाद आपकी स्थिति बदल जाती है।
आईआरसीटीसी के अनुसार अब आपको उस दूसरी ट्रेन का सामान्य यात्री माना जाएगा।
अगर आप टिकट कैंसिल करते हैं तो उसी समय के कन्फर्म टिकट वाले कैंसलेशन नियम लागू होंगे।
दूसरी ट्रेन मिल गई लेकिन मैं गया ही नहीं
अगर विकल्प में दूसरी ट्रेन मिल गई लेकिन आपने उस ट्रेन में भी यात्रा नहीं की, तब रिफंड के लिए टीडीआर का दावा किया जा सकता है।
यहाँ पर ध्यान देने वाली बात यह है कि केवल यात्रा न करने से पैसा अपने आप वापस आएगा, ऐसा न मानें। विकल्प में सीट मिलने के बाद टिकट को साधारण वेटिंग टिकट जैसा न समझें।
टिकट कैंसलेशन: अब क्या करें?
| स्थिति | क्या करें? |
|---|---|
| कन्फर्म टिकट है, यात्रा का प्लान बदल गया | ट्रेन छूटने में कितना समय बचा है यह देखें और उसी हिसाब से टिकट कैंसिल करें। |
| आरएसी या वेटिंग टिकट है और यात्रा नहीं करनी | ट्रेन के तय समय से 30 मिनट पहले तक कैंसिलेशन का नियम देखें। इसके बाद सामान्य रिफंड नहीं मिलता। |
| पूरे पीएनआर के सभी यात्री वेटिंग में रह गए | चार्ट बनने के बाद ई-टिकट अपने आप कैंसिल हो जाता है। लागू कटौती के बाद पैसा उसी खाते में वापस आता है जिससे टिकट बुक हुई थी। यात्रा न करें। |
| एक ही पीएनआर में कुछ कन्फर्म और कुछ आरएसी/वेटिंग हैं | इसे अपने आप कैंसिल होने वाला टिकट न समझें। अगर सभी यात्री नहीं जा रहे हैं तो 30 मिनट वाली समय सीमा बहुत जरूरी है। |
| कन्फर्म तत्काल टिकट है | अपनी तरफ से टिकट कैंसिल करने पर सामान्यतः कोई रिफंड नहीं मिलता। |
| रेलवे ने ट्रेन ही रद्द कर दी | कन्फर्म या आरएसी ई-टिकट में सामान्यतः पूरा पैसा अपने आप वापस आता है। अलग से टिकट कैंसिल या टीडीआर करने की जरूरत नहीं होती। |
| ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट है और आप नहीं जाना चाहते | ट्रेन के असल में रवाना होने से पहले टीडीआर भरें। तभी पूरे रिफंड का दावा किया जा सकता है। |
| ट्रेन का रास्ता बदल गया या ट्रेन बीच में ही समाप्त हो गई | अपनी वास्तविक स्थिति के अनुसार सही टीडीआर कारण चुनें। अलग-अलग मामलों की समय सीमा भी अलग हो सकती है। |
| आईआरसीटीसी में रिफंड हो गया दिख रहा है लेकिन बैंक में पैसा नहीं आया | पहले वही बैंक, कार्ड, यूपीआई या भुगतान का तरीका देखें जिससे टिकट बुक की थी। इसके बाद रिफंड स्थिति देखें। जरूरत पड़े तो आईआरसीटीसी eQuery में शिकायत करें। |
| पैसा कट गया लेकिन टिकट बनी ही नहीं | इसे टिकट कैंसिलेशन न समझें। असफल लेन-देन में स्थिति देखें। अगर टिकट नहीं बनी है तो रकम सामान्यतः अपने आप वापस भेजी जाती है। |
ट्रेन टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के जरूरी सवाल
प्रश्न: कन्फर्म टिकट के लिए 48/12/4 घंटे वाला नियम है या 72/24/8?
उत्तर: अब 72/24/8 घंटे वाला नियम है। रेल मंत्रालय ने मार्च 2026 में पुराने 48/12/4 घंटे के नियम को बदला था। अप्रैल 2026 के सरकारी प्रकाशन में इसे लागू बताया गया है। कुछ पुराने आईआरसीटीसी पेज पर अभी भी आपको पुराना नियम दिख सकता है।
प्रश्न: वेटिंग या आरएसी टिकट कितनी देर पहले तक कैंसिल कर सकते हैं?
उत्तर: सामान्य आरएसी या वेटिंग टिकट को ट्रेन के तय समय से 30 मिनट पहले तक कैंसिल किया जा सकता है। इसके बाद सामान्य रिफंड नहीं मिलता।
प्रश्न: पूरा वेटिंग ई-टिकट रह जाए तो क्या पूरा पैसा वापस मिलता है?
उत्तर: अगर एक ही पीएनआर के सभी यात्री चार्ट बनने के बाद भी वेटिंग में हैं, तो टिकट अपने आप रद्द हो जाता है। पैसा उसी खाते में वापस आता है जिससे बुकिंग हुई थी। इसमें क्लर्केज काटा जा सकता है।
प्रश्न: एक यात्री कन्फर्म और दूसरा वेटिंग हो तो क्या वेटिंग वाले का पैसा अपने आप वापस आएगा?
उत्तर: जी नहीं। यह पूरा वेटिंग पीएनआर नहीं माना जाएगा। अगर वेटिंग वाला यात्री सफर नहीं करता है, तो उसके लिए लागू कैंसलेशन या टीडीआर प्रक्रिया देखनी होगी।
प्रश्न: कन्फर्म तत्काल टिकट कैंसिल करने पर रिफंड मिलता है?
उत्तर: अपनी तरफ से कन्फर्म तत्काल टिकट कैंसिल करने पर सामान्यतः कोई रिफंड नहीं मिलता। लेकिन ट्रेन रद्द होने या रेलवे की तरफ से दूसरी परेशानी होने पर नियम अलग हो सकते हैं।
प्रश्न: ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट हो तो क्या सामान्य तरीके से टिकट कैंसिल कर दें?
उत्तर: नहीं। अगर आप सफर नहीं करना चाहते और पूरा रिफंड लेना है, तो सही टीडीआर कारण चुनें। टीडीआर ट्रेन के आपके स्टेशन से वास्तविक रवाना होने से पहले भरना जरूरी है।
प्रश्न: ट्रेन रेलवे ने ही रद्द कर दी तो क्या टीडीआर भरना होगा?
उत्तर: नहीं। अगर पूरी ट्रेन रद्द है तो कन्फर्म या आरएसी ई-टिकट का पूरा पैसा अपने आप उसी खाते में वापस आता है। इसके लिए अलग से टिकट कैंसिल या टीडीआर भरने की जरूरत नहीं है।
प्रश्न: आईआरसीटीसी में रिफंड सफल दिख रहा है लेकिन बैंक में पैसा नहीं आया तो क्या करें?
उत्तर: पहले Refund History में Bank Reference Number देखें और उसी नंबर से अपने बैंक में पूछें। फिर भी पैसा न मिले तो आईआरसीटीसी की eQuery सेवा में शिकायत कर सकते हैं।
प्रश्न: एक पीएनआर में केवल एक यात्री का टिकट कैंसिल कर सकते हैं?
उत्तर: जी हाँ। इसे आंशिक कैंसलेशन कहते हैं। जिस यात्री को कैंसिल करना है केवल उसी को चुनें। बाकी यात्रियों के लिए बदली हुई नई टिकट या ERS जरूर देख लें।
प्रश्न: पहली ट्रेन लेट हुई और उससे जुड़ी दूसरी ट्रेन छूट गई तो रिफंड मिलेगा?
उत्तर: अगर दोनों टिकट Connecting Journey के तहत जुड़े हुए पीएनआर हैं तो इसके लिए अलग टीडीआर कारण दिया गया है। आपको पहली ट्रेन पहुँचने के 3 घंटे के अंदर टीडीआर भरना होता है। केवल दो अलग पीएनआर होने से यह सुविधा अपने आप नहीं मिलती है।
और अंत में…
कुल मिलाकर, ट्रेन टिकट का रिफंड समझने के लिए केवल यह देखना काफी नहीं है कि टिकट कन्फर्म, आरएसी या वेटिंग में है।
टिकट कब रद्द किया जा रहा है, एक ही पीएनआर में बाकी यात्रियों की स्थिति क्या है और परेशानी आपकी तरफ से है या रेलवे की तरफ से, इन सबका असर रिफंड पर पड़ता है।
अब मान लें आपकी ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट है और आप यात्रा नहीं करना चाहते। ऐसे में सीधे टिकट कैंसिल करने के बजाय पहले टीडीआर का सही नियम देखना जरूरी है। इसी तरह एक ही पीएनआर में कुछ सीट कन्फर्म और कुछ वेटिंग हों तो नियम अलग हो सकता है।
सबसे बड़ी गलती यही है कि हर स्थिति में सीधे “Cancel Ticket” दबा दिया जाए या हर मामले में टीडीआर भर दिया जाए।
आप पहले अपना मामला पहचानें और फिर उसी के हिसाब से सही विकल्प चुनें।
समय निकल जाने के बाद सही रिफंड मिलना मुश्किल हो सकता है।

नोट: रेलवे के रिफंड नियम और ऑनलाइन प्रक्रिया समय के साथ बदल सकती है। इस लेख में मैंने नियमों को आसान भाषा में समझाने की कोशिश की है। अगर आपका मामला सामान्य से अलग है या रिफंड की रकम अधिक है, तो आईआरसीटीसी पर उस समय दिख रहे नियम, रेलवे की आधिकारिक जानकारी और सहायता केंद्र से मिले जवाब को ही सही मानें। नियम आखिरी बार जाँचे गए: 13 सितंबर 2026 |





