कैमरा आइसो (ISO) और नॉइज क्या है | जाने बेस्ट सेटिंग कैसे करें?

फोटोग्राफी में ISO का मतलब होता है कि आपके कैमरे का सेंसर लाइट के प्रति कितना संवेदनशील (sensitive) है|

यह एक्सपोजर ट्रायंगल का वह तीसरा कोना है जो आपकी फोटोग्राफी पर असर डालता है, बाकी दो आप पिछले ट्यूटोरियल में पढ़ चुके हैं जिन्हें शटर स्पीड और अपर्चर के नाम से जाना जाता है |

आप इसकी सेटिंग को बदलकर यानि घटा बढ़ा कर किसी तस्वीर को अंडर एक्सपोज़ (डार्क) या फिर ओवरएक्सपोज़ (ब्राइट) कर सकते हैं |

आपको लगता होगा कि कम रौशनी में आईएसओ को बढ़ा कर आप बढ़िया एक्सपोजर पा सकते हैं पर इसके कुछ हानिकारक परिणाम भी होते हैं |

क्या हैं वो परिणाम और कितना आइसो हमें रखना चाहिए ?

Learn Basic Photography in Hindi सीरीज के भाग # 7 में आपका स्वागत है |

आज हम जानेंगे कि ISO क्या होता है और कैसे इसे सेट किया जाता है जिससे आप बेहतरीन फोटो खींच सकें?

 

आईएसओ क्या है | What is ISO in Camera in Hindi?

camera film and sensor showing iso

Camera ISO full form in Hindi

ISO का full form होता है – International Organization for Standardization, एक ऐसा संगठन जो अंतरराष्ट्रीय मानकों को निर्धारित करता है|

अब आप पूछेंगे कि कि कोई संगठन जो स्टैण्डर्ड बनाता है उसका कैमरे से क्या मतलब है?

सन 1974 से पहले जब फिल्म रोल चला करते थे तब फिल्म की सेंसिटिविटी नापने के लिए ASA या DIN स्टैण्डर्ड का प्रयोग किया जाता था |

ऊपर पहली तस्वीर में देखें एक पुरानी फिल्म रोल जिसमे ASA-64 और DIN-36 दिखा रहा है |

सन 1974  के बाद ASA और DIN को एक में ही मिलाकर ISO कर दिया गया जिसका मतलब था  कि कैमरा फिल्म लाइट के प्रति कितना संवेदनशील (सेंसिटिव) है  (तस्वीर -2  )|

डिजिटल कैमरा का दौर आने के बाद भी सभी कैमरा कंपनियों ने ISO को ही अपनाया और इसे कैमरा सेंसर की सेंसिटिविटी कहा गया  (तस्वीर – 3)|

फोटोग्राफी में ISO, आईएसओ स्पीड या आईएसओ सेंसिटिविटी एक ही सेटिंग होती है जिसका मतलब है फिल्म/सेंसर की लाइट के प्रति सेंसिटिविटी और इसे एक नंबर से दिखाया जाता है |

जैसे जैसे आप ISO की संख्या बढाते जायेंगे वैसे वैसे कैमरे का सेंसर लाइट के प्रति अधिक सेंसिटिव हो जायेगा और इससे ब्राइट तस्वीर आयेगी |

उसी तरह आईएसओ का नंबर कम करने पर तस्वीर डार्क होती चली जाएगी बिना कोई और सेटिंग को बदले हुए |

इसीलिए कहा जाता है कि आईएसओ भी शटर स्पीड और अपर्चर के अलावा एक्सपोज़र को कण्ट्रोल कर सकता है |

यहाँ  ध्यान देने वाली बात यह है कि आईएसओ बढाने के साथ ही आपकी फोटो में ग्रेन्स या नॉइज़ की समस्या आने लगेगी जिसके बारे में हम आगे बात करेंगे |

 

कैमरे में आइसो को कहाँ देख सकते हैं?

DSLR camera manual setting

ISO को आप अपने कैमरे के व्यूफाइंडर या ऊपर दी गयी एलसीडी स्क्रीन में देख सकते हैं जो एक संख्या संख्या (नंबर) के रूप में होता  है |

हो सकता है कुछ बेसिक कैमरा मॉडल में व्यूफाइंडर या ऊपर वाली एलसीडी स्क्रीन नहीं हो |

इस कंडीशन में आप अपने कैमरे के पीछे लगी हुई एलसीडी स्क्रीन में भी इसे देख सकते हैं |

ऊपर दी गयी फोटो में हाईलाइट किया गया भाग देखें, जहाँ पर पर ISO है 250 |

 

कैमरे में आइसो की रेंज क्या होती है?

नीचे दी गयी ग्राफ़िक देखें |

इसमें ISO की पूरी रेंज के बारे में बताया गया है और इसमें यह भी दिखाया गया है कि बढ़ते और घटते हुए लाइट सेंसिटिविटी के कारण आपकी फोटो पर क्या प्रभाव पड़ेगा |

ISO effect on exposure

अलग अलग प्रकार के कैमरे में अलग अलग ISO सेटिंग होती है पर अधिकतर मिररलेस या DSLR कैमरों में यह कुछ ऐसा रहता है :-

  • 100 (सबसे कम आई.एस.ओ.)
  • 200
  • 400
  • 800
  • 1600
  • 3200
  • 6400 (सबसे अधिक आई.एस.ओ.)

ध्यान दें, जब भी आप आईएसओ को दोगुना करते हैं तब आपकी फोटो की ब्राइटनेस दोगुनी हो जाती है |

 

Base ISO क्या होता है और आपके लिए यह क्यों ज़रूरी है?

आपके कैमरे में सबसे कम वाली ISO संख्या को ही Base ISO कहा जाता है |

अब आप पूछेंगे कि मेरे लिए क्यों यह ज़रूरी है?

यह बेस आईएसओ सेटिंग ही है जिसपर पर बिना किसी नॉइज़ के सबसे बढ़िया तस्वीर आती है (आइसो के अलावा शटर स्पीड और अपर्चर भी ज़रूरी है) |

जहाँ तक हो सके तो आप अपनी सभी तस्वीरें सबसे कम यानि बेस आईएसओ पर ही खींचें जब तक किसी भी प्रकार की लाइटिंग की समस्या न हो |

आप कुछ कैमरे में देखते होंगे जिसमें डायनामिक आई.एस.ओ. के बारे में बताया जाता है जहाँ आप सेंसर की लाइट सेंसिटिविटी को 6400 से बहुत ऊपर या 100 से बहुत कम भी कर सकते हैं |

मेरा मानना है कि इन सब सेटिंग से बच कर रहें क्योंकि ऐसी सेटिंग हर समय बढ़िया रिजल्ट्स नहीं देते हैं |

 

नॉइज क्या है | ISO बढाने पर Noise क्यों बढ़ता है?

what is noise in photography

आपने अक्सर देखा होगा कि जब भी कम लाइट होती है और आपका कैमरा ऑटो मोड में होता है तो वह शटर स्पीड और अपर्चर को एडजस्ट करने के अलावा ISO को भी बढ़ा देता है |

आईएसओ सेंसिटिविटी बढ़ने के कारण ही तस्वीरों में जगह जगह सफेद दाने जैसे दिखाई देते हैं |

इन दानेदार सी दिखने वाली चीज़ों के कारण ही फोटो की क्वालिटी पर खासा असर पड़ता है |

इसी दानेदार वस्तु को ही नॉइज कहते हैं जो कैमरे के सेंसर पर किसी इलेक्ट्रॉनिक अस्थिरता के कारण होती है |

आई.एस.ओ. सेंसिटिविटी बढ़ने के साथ ही सेंसर के आउटपुट सिग्नल बहुत अधिक यानि एम्पलीफाई हो जाते हैं जिसके कारण ग्रेन्स या नॉइज़ की समस्या आती है |

मोबाइल फोटोग्राफी के दौरान रात में अक्सर यही समस्या आती है जिसे ISO को कम कर ही सही किया जा सकता है |

अधिक आई.एस.ओ. = अधिक नॉइज़ (खराब फोटो), कम आई.एस.ओ. = नॉइज़ नहीं (शार्प फोटो)

किसी सेंसर के पिक्सेल साइज़ पर नॉइज़ बहुत निर्भर करता है, जैसे एक फुल फ्रेम सेंसर कैमरा में  किसी स्मार्टफोन कैमरा की अपेक्षा बेहतर नॉइज़ कण्ट्रोल होता है |

अब आप पूछेंगे कि फिर तो हमें अधिक आई.एस.ओ. की आवश्यकता ही नहीं है अगर नॉइज़ की समस्या को कम से कम रखना है?

कई बार ऐसी कंडीशन आ ही जाती है जैसे लो लाइट फोटोग्राफी या स्पोर्ट्स /वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी जब हमें ISO बढ़ाना ही पड़ता है |

यदि आपके पास बड़े सेंसर वाला कैमरा है तब RAW फॉर्मेट में तस्वीर लेकर नॉइज़ की समस्या को  को कुछ विशेष  एडिटिंग टूल्स  के द्वारा  ठीक किया जा सकता है |

देखना न भूलें!

 

 ISO के लिए कैमरा सेटिंग कैसे करें?

किसी कैमरे में आईएसओ की रेंज बहुत बड़ी होती है और अक्सर यह कंफ्यूज करती है कि हमें कौन सा आईएसओ सेंसिटिविटी चुनना चाहिए |

आइये हम जानते हैं कि वो कौन सी कंडीशन या सिचुएशन हैं जिसमे आपको कम या अधिक आईएसओ का प्रयोग करना होता है |

कैमरा में अधिक आईएसओ सेटिंग कब यूज़ करें?

birds shot at high shutter speed
f11, 1/1000s. ISO-1600

हम यह जानते हैं कि बेस आईएसओ पर हमेशा शार्प तस्वीर आती है पर कई बार सीन को देखते हुए इसे बदलना भी पड़ता है |

आप ऊपर मेरे द्वारा खींची हुई यह तस्वीर देखें |

फ़ास्ट मोशन कैप्चर करने के लिए मुझे शटर स्पीड को 1/1000 सेकंड रखना पड़ा जिससे कम लाइट भीतर जाएगी और तस्वीर अंडर एक्सपोज्ड हो सकती है |

अब फोटो में सही  एक्सपोज़र रखने के लिए मुझे आईएसओ को 1600 तक बढ़ाना पड़ा और नतीजा आपके सामने ही है |

यदि इस समय मैं केवल बेस आईएसओ पर रख कर शटर स्पीड को कम करता तब तस्वीर में एक मोशन ब्लर आ सकता था |

वहीँ अगर बेस आईएसओ पर रखते हुए अपर्चर को f11 से बड़ा रखता तब शार्प तस्वीर नहीं आती |

कुल मिलकर अगर आपके सीन में लाइट की थोड़ी कमी है या कोई फ़ास्ट एक्शन सीन है तब आप नॉइज़ को देखते हुए आईएसओ को एक रेंज तक बाधा सकते हैं |

अगर आप पूछेंगे कि वो रेंज क्या है तो यह हर कैमरे के हिसाब से अलग अलग होती है |

जहाँ फुल फ्रेम कैमरा का डायनामिक रेंज बेहतर होता है तो ऐसे कैमरे में आप आईएसओ3200 तक भी जा सकते हैं |

वहीँ एक क्रॉप सेंसर कैमरा में 1600 आईएसओ तक बढ़िया तस्वीरें आती हैं |

ध्यान दें 800 से ऊपर की आईएसओ सेंसिटिविटी को हाई कहते हैं | 

 

कैमरा में कम आईएसओ सेटिंग कब यूज़ करें?

duck shot at low iso

कम से कम आईएसओ आप जब चाहे तब यूज़ करें जब तक आपके सीन की डिमांड पूरी होती हो और एक्सपोज़र बढ़िया आता हो |

जब भी लाइटिंग कंडीशन ठीक ठाक हो और सीन की जरूरत के बराबर रौशनी हो तब आप कम से कम ISO संख्या पर ही रहें |

यदि आप फ़्लैश या लाइटिंग का उपयोग कर रहे हैं तब भी आप कम से कम आईएसओ में ही शूट करें |

अब आप पूछेंगे कि कम आईएसओ संख्या क्या है ?

कोई भी Base ISO संख्या (50, 80,100) से लेकर  400 तक के नम्बर को कम आईएसओ संख्या कहते हैं |

जैसे ऊपर दी गयी तस्वीर में देखें, यहाँ पर लाइटिंग ठीक होने के कारण आईएसओ 125 का उपयोग किया गया है |

 

बेस्ट कैमरा आईएसओ सेटिंग | 6 प्रैक्टिकल टिप्स 

1. अपने कैमरे को सीन के हिसाब से प्रोग्राम ऑटो. शटर प्रायोरिटी, अपर्चर प्रायोरिटी या फुल मैन्युअल मोड में लें |

2. अब आपको जितना डेप्थ ऑफ़ फील्ड चाहिए उसके हिसाब से अपर्चर सेट कर लें |

3. अपने कैमरे के ISO को मिनिमम पर सेट करें और शटर स्पीड बदलें |

4. अगर आपकी फोटो में मोशन ब्लर आ रहा है तब शटर स्पीड या आईएसओ को थोड़ा बढ़ाएं |

5. अगर आप शटर स्पीड और कम नहीं कर सकते और  आईएसओ बढ़ाना ही अंतिम विकल्प है तब आप अपर्चर को थोड़ा और खोल सकते हैं |

6. अपर्चर बढ़ने से आपको शैलो डेप्थ ऑफ़ फील्ड मिलेगा पर आईएसओ भी कम रख सकते हैं |

कुल मिला कर यही वह प्रैक्टिकल टिप्स हैं जिनकी मदद से आप हमेशा शार्प तस्वीर खींच सकते हैं |

आपको अपनी फोटो में मोशन ब्लर, नॉइज़ और डेप्थ ऑफ़ फील्ड के बीच बढ़िया सम्बन्ध बना कर चलना होगा जो प्रैक्टिस से ही आयेगा |

 

और अंत में…

ISO को वैसे तो एक्सपोज़र ट्रायंगल के तीन कोनो में से एक माना जाता है पर असल में यह एक्सपोज़र ट्रायंगल का पार्ट नहीं है | 

शटर स्पीड और अपर्चर किसी फोटो को ब्राइट या डार्क बनाते हैं पर आईसो एक प्रकार की लाइट सेंसिटिविटी है जो इलेक्ट्रॉनिक होती है |

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि आईएसओ बढाने के साथ साथ फोटो में ग्रेन्स या नॉइज़ की समस्या भी बढती जाती है |

जहाँ तक हो सके आप अपने कैमरे के base ISO का ही प्रयोग करें और यदि करना ही है तब 1600 से अधिक न जाएँ |

उम्मीद करता हूँ आपको हमारी यह बात चीत ज़रूर पसंद आई होगी और आपको बहुत कुछ सीखने को भी मिला होगा |

आगे हम कैमरा मीटरिंग के बारे में बहुत विस्तार से चर्चा करेंगे जिसे आपके लिए समझना बहुत ज़रूरी है |

आप हमें कमेंट करें और बताएं कि यह बेसिक फोटोग्राफी सेशन आपको कैसा लग रहा है और आप इसमें और क्या जानना चाहते हैं |

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