Last Updated on September 5, 2026 by अनुपम श्रीवास्तव
कैमरा लेंस का फोटोग्राफी में वही महत्त्व है जो सिम कार्ड का मोबाइल से होता है |
जिस प्रकार बिना सिम कार्ड के आप मोबाइल से बात नहीं कर सकते उसी प्रकार बिना लेंस के आप कैमरा से सही फोटो नहीं खींच सकते |
सभी camera lens का एक ही मुख्य कार्य होता है : वे कैमरे के सामने के दृश्य से निकलने वाले प्रकाश को इकट्ठा करते हैं और इसे कैमरे के पीछे रखे डिजिटल सेंसर पर एक इमेज के रूप में प्रोजेक्ट करते हैं |
फोटोग्राफी की दुनियां में ऐसी बहुत सारी चीज़ें हैं जो आपके फोटो की क्वालिटी यानि गुणवत्ता निर्धारित करती हैं और इनमें से सबसे ज़रूरी होता है लेंस |
एक बढ़िया क्वालिटी के लेंस से आप साधारण कैमरे से शानदार तस्वीर खींच सकते हैं और वहीँ साधारण लेंस का उपयोग कर के आप बढ़िया कैमरा से भी अच्छी फोटो नहीं खींच पाएँगे |
इस बातचीत में आज हम जानेंगे कि
- कैमरा लेंस क्या है और कैसे काम करता है?
- लेंस के स्पेसिफिकेशन क्या होते हैं?
- लेंस के प्रकार क्या हैं (types of camera lenses)?
- फोटोग्राफिक कैमरे का अभिदृश्यक लेंस क्या होता है?
- विभिन्न प्रकार की फोटोग्राफी में कौन सा लेंस उपयोग करना है?
- क्रॉप सेंसर पर 50mm अलग क्यों दिखता है?
- किट लेंस कब तक ठीक है और अगला लेंस कैसे चुनें?
- फुल फ्रेम और एपीएस-सी लेंस आपस में कब चल सकते हैं?
- कैमरा में स्टेबिलाइजेशन हो तो लेंस में भी इसकी जरूरत है या नहीं?
तो फिर देर किस बात की, आइये अपनी बातचीत को आगे बढाते हैं |
पहले एक सीधा जवाब |
कैमरा लेंस क्या है | What is Camera Lens in Hindi?

अगर आपसे पूछा जाये कि फोटोग्राफी के लिए आपके डीएसएलआर या मिररलेस कैमरा में सबसे जरूरी भाग क्या है तो आपका उत्तर क्या होगा?
कैमरा बॉडी !!
जी नहीं, बॉडी जरूरी है पर एक हद तक |
यदि आपका उत्तर है लेंस तब आप बिलकुल सही हैं |
अगर आप बिना लेंस के केवल कैमरा बॉडी से फोटोग्राफी करेंगे तब आपको अपनी फोटो में केवल सफ़ेद रौशनी ही दिखाई देगी और कुछ नहीं |
वो कैमरा लेंस ही होता है जो बाहर की लाइट को फोकस कर सेंसर पर केन्द्रित करता है जिससे आपको एक बेहतर तस्वीर मिल सके |
कैमरा लेंस या फोटोग्राफिक लेंस एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग एक निश्चित फोकल बिंदु (फिल्म या सेंसर) पर प्रकाश लाने के लिए किया जाता है|
जैसे ही कैमरा सेंसर पर लाइट फोकस होती है तभी फोटो का निर्माण होता है |
अब आप ऊपर दी गयी ग्राफ़िक देखें :-
लेंस से होते हुए लाइट सीधा सेंसर के पास फोकस हो रही है और वहीँ आपको एक शार्प फोटो मिल जाती है |
यदि रौशनी किसी बिंदु पर मिलेगी नहीं तब इसका मतलब है कि आपका फोकस बढ़िया नहीं हो रहा है और इसी कारण से तस्वीर धुंधली आएगी |
यहाँ आपको एक छोटी सी बात समझना जरूरी है।
फोकल लेंथ को केवल “लेंस के भीतर जहाँ प्रकाश मिलता है वहाँ से सेंसर की दूरी” मान लेना हर कैमरा लेंस के लिए सही नहीं होगा।
फोटोग्राफी में हमारे काम की आसान बात यह है कि फोकल लेंथ mm में लिखी होती है और इससे हमें मुख्य रूप से यह पता चलता है कि लेंस कितना चौड़ा या कितना संकरा दृश्य दिखाएगा।
इसकी संख्या अगर कम होगी तो दृश्य अधिक चौड़ा होगा और अगर संख्या बढ़ेगी तो दृश्य अधिक संकरा दिखाई देगा।
कैमरा में कौन सा लेंस होता है | Which Lens is Used in Camera?
कैमरा में उत्तल लेंस (Convex Lens) होता है |
नीचे ग्राफिक में उत्तल लेंस या Convex Lens देखें जो किसी सब्जेक्ट से टकरा कर आने वाले प्रकाश को इकठ्ठा करता है और फिर इसे कैमरा सेंसर पर प्रोजेक्ट करता है |

पर यह हमेशा नहीं होता है !
आमतौर पर एक लेंस में ऑप्टिकल त्रुटियां हो सकती हैं जैसे क्रोमेटिक अब्रेसन या रंगों का विस्थापन |
अगर कैमरा लेंस में एक ही लेंस एलिमेंट का उपयोग किया जायेगा तब आने वाली लाल, हरी और नीली (RGB) लाइट अलग अलग पॉइंट पर फोकस कर सकती है जिसके कारण रंगों के किनारों पर गड़बड़ी दिखाई दे सकती है |
लेंस की इन ऑप्टिकल गलतियों को सुधारने के लिए कॉम्बिनेशन या ग्रुप में लेंसों का प्रयोग किया जाता है |
इसीलिए हम कह सकते हैं कि बढ़िया क्वालिटी के लेंसों में उत्तल लेंस (Convex Lens) और अवतल लेंस (Concave Lens) के कॉम्बिनेशन का उपयोग होता है |
यहाँ ध्यान रखें कि अवतल लेंस का काम केवल “ज़ूम बढ़ाना” नहीं होता है।
आधुनिक कैमरा लेंस में अलग-अलग आकार के एलिमेंट फोकस, रंगों की गड़बड़ी, किनारों की शार्पनेस और दूसरी ऑप्टिकल कमियों को कण्ट्रोल करने के लिए मिलकर काम करते हैं।
उदहारण के लिए आप पुराने Vivitar 70-210mm ज़ूम लेंस के कट-सेक्शन में देख सकते हैं कि उसके भीतर कई तरह के लेंस एलिमेंट लगे हैं |

फोटोग्राफिक लेंस के कितने भाग होते हैं | Parts of Camera Lens in Hindi

लेंस के भीतर कई शीशे होते हैं जिनमें से कुछ तो फिक्स होते हैं और बाकी फोकस या ज़ूम करने के दौरान इधर उधर हो सकते हैं |
इतनी सारी चीज़ें भीतर रहने के कारण लेंस को लेंस बैरल भी कहा जाता है |
किसी कैमरा लेंस को अगर आप ऊपर से देखेंगे तब उनमें बहुत सारे कण्ट्रोल दिखेंगे जिसके बारे में आपको ऊपर दी गयी तस्वीर में समझाया गया है |
फोटोग्राफिक लेंस में ये पार्ट्स होते हैं :-
भाग | काम |
फ़िल्टर थ्रेड | लेंस के ऊपर अलग से फ़िल्टर लगाने के लिए |
ज़ूम रिंग | घुमा कर ज़ूम करने के लिए |
फोकस रिंग | घुमा कर फोकस करने के लिए |
इमेज स्टेबिलाइजेशन कण्ट्रोल | हाथ के हल्के कम्पन से होने वाले कैमरा-शेक को कम करने के लिए |
लेंस माउंट | लेंस और कैमरा बॉडी के बीच कनेक्शन |
फोकल लेंथ मार्किंग | फोकल लेंथ की संख्या |
लेंस स्पेसिफिकेशन मार्किंग | लेंस की जानकारी (फोकल लेंथ, अपर्चर, फ़िल्टर साइज़ आदि) |
अपर्चर मार्किंग | अधिकतम अपर्चर की जानकारी |
कैमरा लेंस पर बने Letters और Numbers का क्या मतलब है?

जब भी आप कैमरा लेंस के ऊपर देखते होंगे तो यह जरूर सोचते होंगे कि इन नंबरों और अक्षरों का क्या मतलब होता है |
इन मार्किंग के बारे में जानना आपके लिए बहुत जरूरी है क्योंकि :-
- इनकी मदद से आप लेंस के बारे में जान सकते हैं |
- आप पता कर सकते हैं कि अमुक लेंस आपकी फोटोग्राफी शैली के लिए जरूरी है कि नहीं |
- कई लेंस में से अपनी पसंद का लेंस खरीद सकते हैं |
उदहारण के लिए लिए हम ऊपर दिखाए गए लेंस की स्पेसिफिकेशन लेते हैं :-
Canon Zoom lens EF-S 18-55mm 1:3.5-5.6 IS II Ø58mm
हांलाकि लेंस की स्पेसिफिकेशन कंपनी के हिसाब से अलग हो सकती है पर काफी कुछ एक जैसा ही होता है |
मार्किंग | आसान मतलब |
| 18-55mm | यह फोकल लेंथ की रेंज है और यह बताती है कि आपका लेंस एक ज़ूम लेंस है जिसमें 18mm का वाइड एंगल है और 55mm का टेलीफोटो है | इसमें 18mm पर दृश्य चौड़ा होगा और 55mm पर अधिक संकरा होगा। अगर आपके लेंस पर केवल एक ही नंबर है जैसे 50mm तब इसका मतलब वह एक प्राइम लेंस है और ज़ूम नहीं हो सकता है | |
| 1:3.5-5.6 | यह संख्या आपके लेंस के अधिकतर अपर्चर को बताती है जिससे आपको पता चलता है कि आपका लेंस कितना खुल सकता है | जैसे यहाँ पर आपका लेंस का मिनिमम अपर्चर है f/3.5 और अधिकतम f/5.6| जैसे ही आप लेंस को ज़ूम कर 55mm पर पहुचेंगे तब आप f/5.6 से बड़ा अपर्चर नहीं खोल पाएंगे | यहाँ पर आप जो “1 :” देख रहे हैं उसका मतलब है कि एपर्चर संख्या को अनुपात (रेश्यो) के रूप में मापा जाता है | |
| Ø58mm | यह आपके लेंस का बाहरी डियामीटर (व्यास) बताता है | इसकी जरूरत आपको लेंस के ऊपर कोई फ़िल्टर या कैप लगाने के लिए होती है | जैसे इस लेंस के लिए आपको 58 mm व्यास वाला फ़िल्टर लेना होगा तभी वह इस लेंस पर फिट बैठेगा | |
| IS – कैनन : Image Stabilization VR – निकोन : Vibration Reduction OSS – सोनी : Optical Steady Shot OS – सिग्मा : Optical Stabilization VC – टैमरोन : Vibration Compensation | यह सब अक्षरों का मतलब है इमेज स्टेबिलाइजेशन फीचर का लेंस में होना | आप देख ही रहे होंगे कि अलग अलग कम्पनी में इस फीचर को अलग अलग ढंग से लेंस पर दिखाया जाता है | अक्षर कोई भी हो यदि आपके लेंस में यह है तब इसका मतलब है कुछ हद तक आपको हिलने डुलने से फोटो पर प्रभाव नहीं पड़ेगा | |
| II/III | इस संख्या का मतलब है कि यह लेंस का दूसरा वर्शन है | |
| EF-S – कैनन DX – निकोन E /DT – सोनी DC – सिग्मा DI II – टैमरोन | इनमें कई नाम APS-C या छोटे sensor format से जुड़े होते हैं, लेकिन ये सभी “lens mount” नहीं हैं। Mount और sensor format दो अलग बातें हैं।
|
| EF – कैनन FX – निकोन FE – सोनी DG – सिग्मा DI – टैमरोन | इनमें कई नाम full-frame coverage या lens family/format से जुड़े होते हैं। सही compatibility हमेशा camera mount और lens model देखकर check करें। |
लेंस माउंट और सेंसर फॉर्मेट में क्या फर्क है?
यही वह जगह है जहाँ नए फोटोग्राफर सबसे अधिक उलझते हैं। लेंस पर DX, FE या DC लिखा देखकर कई लोग इसे माउंट समझ लेते हैं।
ऐसा हमेशा नहीं है।
माउंट का मतलब है — लेंस कैमरा बॉडी पर किस जोड़ से लगेगा। जैसे Nikon Z, Nikon F, Canon RF, Canon EF या Sony E।
इसके उलट DX, FE, DC जैसी कई मार्किंग इस बात से जुड़ी होती हैं कि लेंस किस आकार के सेंसर को ढकने के लिए बनाया गया है।
इसलिए लेंस खरीदते समय केवल focal length मत देखें।
पहले camera का mount देखें, फिर lens format देखें।
क्रॉप सेंसर पर 50mm लेंस 75mm या 80mm जैसा क्यों दिखता है?
आजकल एक सवाल बहुत पूछा जाता है कि अगर 50mm का लेंस APS-C कैमरा पर लगा दें, तो क्या वह 75mm का हो जाता है?
तो इसका उत्तर है …नहीं।
50mm लेंस, 50mm का ही रहता है और उसकी फोकल लेंथ नहीं बदलती।
बदलता सिर्फ इतना है कि APS-C कैमरे का सेंसर, Full Frame सेंसर से छोटा होता है। इसलिए वह सामने के पूरे दृश्य में से थोड़ा कम हिस्सा रिकॉर्ड करता है।
इसे एक आसान उदाहरण से समझिए।
मान लीजिए आपने एक फोटो खींची और बाद में उसके चारों तरफ का थोड़ा हिस्सा काट दिया। अब वही चीज फोटो में पहले से ज्यादा पास दिखाई देगी। लेकिन आपने न तो कैमरा बदला और न ही लेंस।
APS-C सेंसर में भी कुछ ऐसा ही होता है।
Sony और Nikon के APS-C कैमरों में लगभग 1.5x और Canon में करीब 1.6x का फर्क होता है।
इसलिए APS-C कैमरे पर 50mm लेंस से मिलने वाला दृश्य, Full Frame कैमरे पर लगभग 75mm और Canon APS-C में करीब 80mm जैसा दिखाई देता है।
बस इतना याद रखिए कि 50mm लेंस 75mm नहीं बनता बल्कि यहाँ केवल फोटो का दिखने वाला हिस्सा छोटा हो जाता है।
यही कारण है |
क्या Full Frame Lens को APS-C कैमरा पर लगा सकते हैं?
अक्सर हाँ। लेकिन सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि lens का mount आपके कैमरे के mount से match करता है या नहीं।
Full-frame lens को APS-C कैमरे पर लगाने में आमतौर पर कोई दिक्कत नहीं होती। बस APS-C sensor छोटा होने की वजह से तस्वीर का view थोड़ा crop हो जाता है। यानी वही lens आपको कुछ ज्यादा zoom जैसा दिखाई दे सकता है।
जैसे Sony का FE lens APS-C E-mount कैमरे पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी तरह Nikon का FX lens भी DX body पर लगाया जा सकता है।
लेकिन lens खरीदने से पहले सिर्फ Full-frame या APS-C देखकर फैसला न करें। सबसे पहले camera mount जरूर check करें।
क्या APS-C Lens को Full Frame कैमरा पर लगा सकते हैं?
यह बात कैमरा और लेंस के ब्रांड व माउंट पर निर्भर करती है।
कई मिररलेस कैमरों में APS-C लेंस लगाने पर कैमरा अपने-आप crop mode में चला जाता है। ऐसी स्थिति में सेंसर का पूरा हिस्सा इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए फोटो का resolution भी कम हो सकता है।
कुछ लेंस गलत कैमरा बॉडी पर लगाने से फोटो के किनारों पर काला हिस्सा या ज्यादा dark corners भी दिखाई दे सकते हैं।
इसलिए सिर्फ इतना देखना काफी नहीं है कि लेंस कैमरे में लग रहा है। खरीदने से पहले यह जरूर जांच लें कि वह लेंस आपके कैमरा मॉडल के साथ सही तरह से काम करता है या नहीं।
कैमरा लेंस के प्रकार क्या हैं | What are the Types of Camera Lenses in Hindi?
कैमरे में अलग अलग प्रकार के लेंसों का उपयोग किया जाता है जिसे अलग अलग प्रकार की फोटोग्राफी के दौरान उपयोग में लाया जाता है |
यदि आप camera lens types बारे में जान जाते हैं तब आप हर तरह की परिस्थितियों में इनका सही इस्तेमाल कर पाएंगे |
यहाँ जानने वाली बात यह कि एक ही सिद्धांत विभिन्न ब्रांडों (कैनन, सोनी या निकोन) और विभिन्न प्रकार के कैमरा बॉडी ( डीएसएलआर या मिररलेस) पर लागू होता है |
कैमरा लेंस के प्रकार | Types of Camera Lenses
- प्राइम लेंस | Prime Lens
- ज़ूम लेंस | Zoom Lens
- वाइड एंगल लेंस | Wide Angle Lens
- टेलीफ़ोटो लेंस | Telephoto Lens
- मैक्रो लेंस | Macro Lens
- फिश ऑय लेंस |Fish Eye Lens
- टिल्ट शिफ्ट लेंस | Tilt Shift Lens
आइये डिटेल में जानते हैं कि फोटोग्राफी की दुनियां में लेंस कितने प्रकार के होते हैं |
1. स्टैण्डर्ड, फिक्स्ड या प्राइम लेंस | Standard, Fixed or Prime Lens

ऐसे लेंस जिनका फोकल लेंथ फिक्स्ड रहता है और जिन्हें आप ज़ूम नहीं कर सकते उन लेंसों को प्राइम लेंस कहा जाता है |
जैसे आपके पास एक 50mm का प्राइम लेंस है तब आप केवल इसी फोकल लेंथ पर ही तस्वीर खींच सकते हैं और ज़ूम करने के लिए आपको आगे या पीछे होना पड़ेगा |
कई Prime Lenses बड़े maximum aperture जैसे f/1.8, f/1.4 या उससे भी बड़े aperture में मिलते हैं।
इसी कारण low light और background blur के लिए ये बहुत उपयोगी हो सकते हैं।
लेकिन हर prime lens हर zoom lens से sharp, हल्का या सस्ता हो यह होना जरूरी नहीं है।
क्या आप जानते हैं कि प्राइम लेंस बहुत ही मशहूर हैं और वह सभी प्रकार की फोटोग्राफी में प्रयोग में लाये जाते हैं |
जैसे –
- 24mm / 35mm प्राइम – स्ट्रीट और ट्रैवल फोटोग्राफी
- 50mm /85mm प्राइम – पोर्ट्रेट फोटोग्राफी
- 200mm /400mm/ 500mm प्राइम – वाइल्डलाइफ और स्पोर्ट्स फोटोग्राफी
निफ्टी फिफ्टी (Nifty-Fifty) लेंस क्या है?
फोटोग्राफी के प्राइम लेंसों की दुनियां में निफ्टी फिफ्टी बड़ा ही मशहूर शब्द है |
50mm प्राइम लेंस को ही निफ्टी फिफ्टी लेंस कहा जाता है।
इसे लोकप्रिय बनाने का कारण इसका छोटा आकार, अक्सर बड़ा aperture और बहुत से camera systems में कम कीमत पर उपलब्ध होना है।
अक्सर यह भी कहा जाता है कि 50mm वही focal length है जिसपर हमारी आँखें दुनिया को देखती हैं।
इसे बिल्कुल सही वैज्ञानिक बराबरी न मानें पर हाँ इतना जरूर है कि full-frame camera पर 50mm का view काफी natural लग सकता है।
और अगर आपका कैमरा APS-C है तो वही 50mm view लगभग 75-80mm जैसा tight लगेगा।
इसलिए portrait में यह बढ़िया हो सकता है, लेकिन छोटे कमरे या street walk में आपको पीछे हटने की जगह कम पड़ सकती है।
प्राइम लेंस के फायदे
- कई models में बढ़िया sharpness
- बड़ा maximum aperture मिलने की संभावना
- लो लाइट में बेहतर काम कर सकते हैं
- कई छोटे prime lens वजन में हल्के होते हैं
- कुछ popular prime lens कम दाम में भी मिल जाते हैं
प्राइम लेंस की सीमायें
- फिक्स्ड फोकल लेंथ और ज़ूम नहीं कर सकते
- एक ही lens से हर framing नहीं मिलती
- अलग-अलग जरूरत के लिए एक से अधिक lens रखने पड़ सकते हैं
पहला Prime Lens 35mm लें या 50mm?
इसका जवाब camera से ज्यादा आपकी अपनी photos देती हैं।
अगर आपके पास 18-55mm या 16-50mm kit lens है तो पहले कुछ हफ्ते उसी से फोटो लें।
बाद में देखें कि आपकी पसंदीदा photos अधिकतर किस focal length के आसपास बनी हैं।
अगर आप 24-35mm के आसपास रहते हैं तो 35mm-type lens आपके लिए अधिक natural हो सकता है।
अगर आप portraits अधिक लेते हैं और पीछे हटने की जगह मिलती है तो 50mm अच्छा विकल्प हो सकता है।
एक आसान तरीका |
2. ज़ूम लेंस | Zoom Lens

सबसे पहले तो आप यह समझें कि ज़ूम का मतलब होता क्या है?
ज़ूम = दूर की चीज़ को पास लाना = छोटे से बड़े फोकल लेंथ पर जाना
इसका मतलब यदि आप फोटो खींचते हुए 24 mm फोकल लेंथ से 50 mm पर चले गए तब आपने दोगुना ज़ूम कर लिया |
नहीं समझ आया, चलिए बात को और सरल बनाते हैं :
बहुत ही बुनियादी तौर पर कहें तो फोकल लेंथ हमें बताता है की हमारा लेंस कितना ज़ूम हुआ है यानि कि हमारा view कितना चौड़ा या कितना संकरा हुआ है |
फोकल लेंग्थ की संख्या जितनी अधिक होगी उतना ही ज़ूम हमें मिलेगा और हमारा फील्ड ऑफ़ व्यू उतना ही छोटा होता जायेगा |
तो इस तरह हम कह सकते हैं कि Zoom Lens वह लेंस होते हैं जिनमें आप बिना आगे पीछे किये तरह तरह के फोकल लेंथ पर फोटो खींच सकते हैं |
जूम लेंस का फायदा यह होता है कि आपको बार बार लेंस बदलना नहीं पड़ता है और आप एक ही स्थान पर रहते हुए अलग-अलग framing पा सकते हैं|
उदहारण के लिए आप ऊपर फोटो में देखें तो पाएंगे कि 24-105mm ज़ूम लेंस को आप 24mm फोकल लेंथ से लेकर अधिकतम 105mm तक ले जा सकते हैं |
ज़ूम लेंस भी दो प्रकार के होते हैं :-
- कांस्टेंट अपर्चर – इनका अधिकतम अपर्चर पूरे ज़ूम भर में एक जैसा ही रहता है (जैसे 70 -200mm, f/2.8)
- वेरिएबल अपर्चर – इनका अपर्चर ज़ूम करने के साथ ही कम होता रहता है ( जैसे 55-200 mm. f/4-5.6)
Zoom करने पर f/3.5 से f/5.6 क्यों हो जाता है?
किट लेंस पर आपने अक्सर 18-55mm f/3.5-5.6 लिखा देखा होगा।
यह देखकर कई लोग सोचते हैं कि f/3.5 और f/5.6 सबसे छोटा और सबसे बड़ा aperture है, लेकिन ऐसा नहीं है।
इसका सीधा मतलब है कि जब लेंस 18mm पर है, तब aperture ज्यादा से ज्यादा f/3.5 तक खुल सकता है।
जैसे-जैसे आप zoom करके 55mm पर जाते हैं, वही maximum aperture f/5.6 रह जाता है।
यानी zoom बढ़ाने पर इस लेंस की light लेने की क्षमता थोड़ी कम हो जाती है।
यह कैमरे की खराबी नहीं, बल्कि इस तरह के किट लेंस का design है।
Zoom lens के फायदे
- बार बार लेंस बदलने का झंझट नहीं
- तरह तरह के फोकल लेंथ एक ही लेंस में मौजूद
- यात्रा, family और बदलते scene में बहुत उपयोगी
- एक ही जगह से framing जल्दी बदली जा सकती है
Zoom lens की सीमायें
- कुछ zoom lens अपेक्षाकृत भारी होते हैं
- बड़े zoom range वाले सस्ते lens में optical compromise हो सकता है
- वेरिएबल aperture lens में zoom करने पर maximum aperture छोटा हो जाता है
3. वाइड एंगल कैमरा लेंस | Wide Angle Camera Lens

जैसा कि नाम से ही लग रहा है वाइड एंगल लेंस मतलब ऐसे लेंस जो बहुत ही चौड़े शॉट्स ले सके |
कई बार हम लोग कोई ग्रुप फोटो क्लिक करना चाहते हैं और तब देखते हैं कि सभी लोग फ्रेम में फिट नहीं हो पा रहे हैं |
अगर आपके पीछे जाने के लिए जगह है तब तो ठीक पर यदि पीछे की ओर जाने के लिए जगह नहीं है तब आप क्या करेंगे?
इस तरह की परेशानी को आप wide angle lens के साथ सुलझा सकते हैं जिससे सब कुछ आपकी फ्रेम के भीतर ही आ जायेगा |
वाइड एंगल लेंस का उपयोग लैंडस्केप और आर्किटेक्चरल फोटोग्राफी के लिए भरपूर किया जाता है जहाँ बहुत ही चौड़े कैनवास को शूट करना होता है |
वाइड एंगल लेंस में आपको प्राइम जैसे 20mm /16mm /12mm और ज़ूम जैसे 10-18mm लेंस भी मिल जायेंगे |
अब एक प्रश्न जो अक्सर आता है कि अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस क्या होता है जो अक्सर आजकल के मोबाइल फोन में भी दिख जाता है?
वाइड एंगल और अल्ट्रा वाइड एंगल कैमरा लेंस में क्या अंतर है?
Wide-angle lens की कोई एक fixed सीमा नहीं होती और अलग-अलग कंपनियां इसे थोड़ा अलग तरीके से बताती हैं।
आम तौर पर Full-frame कैमरे में 35mm से कम focal length को wide-angle माना जाता है।
इससे भी कम focal length वाले lens को ultra-wide कहा जाता है।
लेकिन APS-C कैमरे में यही wide view पाने के लिए इससे कम focal length की जरूरत पड़ती है।
इसलिए केवल इतना याद रखना कि “24mm मतलब wide-angle” सही तरीका नहीं है।
यह भी देखना जरूरी है कि आपका कैमरा Full-frame है या APS-C, क्योंकि उसी के हिसाब से lens का view बदलता है।
Wide Angle से चेहरा खिंचा हुआ क्यों दिखता है?
Wide-angle lens की कोई एक fixed सीमा नहीं होती, लेकिन समझने के लिए इसे आसान तरीके से ऐसे याद कर सकते हैं।
Full-frame कैमरे में आम तौर पर 35mm से कम focal length को wide-angle माना जाता है।
लगभग 24mm से कम focal length वाले lens को ultra-wide-angle कहा जाता है। जैसे 20mm, 18mm, 16mm या 14mm lens।
APS-C कैमरे में sensor छोटा होता है, इसलिए वही wide view पाने के लिए इससे कम focal length की जरूरत पड़ती है।
APS-C में लगभग 15–16mm या इससे कम focal length काफी wide या ultra-wide view देती है।
यही कारण है कि केवल यह याद रखना कि “24mm मतलब wide-angle” हमेशा सही नहीं होगा।
यह भी देखना जरूरी है कि आपका कैमरा Full-frame है या APS-C, क्योंकि sensor के हिसाब से lens का दिखाई देने वाला view बदल जाता है।
सीधे शब्दों में कहें तो—
Full-frame में:
35mm के आसपास — हल्का wide
24–35mm — wide-angle
24mm से कम — ultra-wide-angle
APS-C में:
लगभग 16mm या इससे कम — ultra-wide जैसा view
Landscape, architecture, interiors और छोटे कमरे में ज्यादा area को frame में लेने के लिए wide और ultra-wide lens बहुत काम आते हैं।
वाइड एंगल लेंस के फायदे
- चौड़ा फील्ड ऑफ़ व्यू
- छोटी जगह, interior, landscape और architecture में उपयोगी
- प्राइम और ज़ूम दोनों में उपलब्ध
- पास के foreground को मजबूत तरीके से दिखा सकता है
वाइड एंगल लेंस की सीमायें
- बहुत पास से portrait लेने पर चेहरा खिंचा हुआ लग सकता है
- सस्ते/बहुत wide lens में किनारों पर distortion अधिक हो सकता है
- background blur संभव है, पर telephoto या fast portrait lens की तुलना में पाना कठिन हो सकता है
4. टेलीफोटो लेंस | Telephoto lens

टेलीफोटो लेंस का इस्तेमाल दूर की चीजों को पास दिखाने के लिए किया जाता है।
इनका देखने का दायरा कम होता है, इसलिए दूर खड़ा कोई इंसान, जानवर या पक्षी भी फोटो में बड़ा दिखाई देता है।
इसी वजह से इन लेंसों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा वाइल्डलाइफ, स्पोर्ट्स, बर्ड और एस्ट्रो फोटोग्राफी में किया जाता है।
टेलीफोटो लेंस प्राइम और ज़ूम दोनों तरह के मिलते हैं। जैसे 300mm और 500mm प्राइम लेंस हैं, जबकि 70-200mm, 100-400mm और 150-600mm ज़ूम लेंस हैं।
बड़े टेलीफोटो लेंस अक्सर भारी होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इनके साथ हमेशा tripod लगाना जरूरी है।
अच्छी shutter speed और कैमरा या लेंस में मौजूद stabilization की मदद से कई टेलीफोटो लेंस हाथ में पकड़कर भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
फोकल लेंथ के हिसाब से इन लेंसों को भी टेलीफोटो और सुपर टेलीफोटो में बांटा जा सकता है |
टेलीफोटो और सुपर टेलीफोटो लेंस में क्या अंतर है?
फुल फ्रेम कैमरा के हिसाब से इसे आसान तरीके से ऐसे समझ सकते हैं—
70-200mm — टेलीफोटो
300mm और उससे ऊपर — सुपर टेलीफोटो
उदाहरण के लिए 70-200mm लेंस portrait, sports और थोड़ी दूरी से photography के लिए काफी काम आता है।
300mm, 400mm, 500mm और 600mm जैसे लेंस दूर बैठे पक्षियों, wildlife और मैदान में होने वाले sports के लिए ज्यादा उपयोगी होते हैं।
150-600mm और 200-600mm जैसे zoom lens इसलिए काफी पसंद किए जाते हैं क्योंकि एक ही lens में 150/200mm से लेकर 600mm तक की range मिल जाती है।
अगर आपका कैमरा APS-C है तो उसी lens का view और ज्यादा पास दिखाई देगा। जैसे Nikon/Sony के APS-C कैमरे पर 200mm lens लगभग 300mm जैसा view देगा।
टेलीफोटो लेंस के फायदे
दूर से ही subject की अच्छी photo ली जा सकती है
पक्षी और wildlife के लिए बहुत उपयोगी
background काफी पास और बड़ा दिखाई दे सकता है
अच्छा background blur मिल सकता है
prime और zoom दोनों तरह के विकल्प मिलते हैं
टेलीफोटो लेंस की सीमायें
300mm, 400mm, 500mm और 600mm जैसे बड़े lens भारी हो सकते हैं
ज्यादा focal length पर हाथ का हल्का सा हिलना भी photo में दिखाई दे सकता है
अच्छे telephoto lens काफी महंगे मिल सकते हैं
हर lens की minimum focusing distance अलग होती है, इसलिए बहुत पास रखी चीज पर focus न होना सामान्य बात है
कैमरा में IBIS है तो IS/VR वाला Lens जरूरी है?
यह सवाल नए कैमरा खरीदने वालों के मन में अक्सर आता है।
इसका सीधा जवाब है — जरूरी नहीं है, लेकिन खासकर telephoto lens में इसका फायदा मिल सकता है।
IBIS कैमरा के अंदर sensor को स्थिर रखने की कोशिश करता है। वहीं IS, VR या OSS वाला lens अपने अंदर की stabilization system से हाथ के हिलने का असर कम करता है।
कुछ कैमरा और lens ऐसे भी होते हैं जिनमें दोनों system मिलकर काम करते हैं।
मान लीजिए आप 24mm या 35mm पर दिन में photo ले रहे हैं तो यहाँ stabilization की जरूरत शायद बहुत कम महसूस हो।
लेकिन अगर आप 300mm, 400mm या 600mm पर दूर बैठे पक्षी की photo ले रहे हैं तो हाथ का छोटा सा हिलना भी ज्यादा दिखाई देता है।
यहाँ पर stabilization काफी काम आ सकता है।
एक बात याद रखें कि stabilization आपके कैमरे के हिलने को कम करता है।
अगर पक्षी उड़ रहा है, खिलाड़ी दौड़ रहा है या गाड़ी चल रही है तो उसे रोकने के लिए आपको तेज shutter speed ही रखनी होगी।
5. मैक्रो लेंस | Macro Lens

कई बार आपने कुछ ऐसी तस्वीरें देखी होंगी जिसमें फूलों के भीतरी भाग को बड़े ही करीब से दिखाया गया होता है या फिर छोटे छोटे कीड़े मकोड़े को बहुत बड़ा सा दिखाया जाता है |
आप सोचते होंगे कि ऐसी तस्वीरें कैसे ली जाती होंगी?
तो इसका जवाब है मैक्रो लेंस के प्रयोग से |
देखिये मैक्रो लेंस एक ऐसा लेंस है जिसकी मदद से आप बहुत नजदीक की छोटी चीजों को बड़े आकार और बहुत बारीक detail के साथ shoot कर सकते हैं जो आम लेंस के साथ संभव नहीं है |
मैक्रो लेंस में 1:1 का क्या मतलब है?
Macro Lens पर आपने 1:1, 1:2 या 2:1 जैसे नंबर देखे होंगे। इसे समझना बहुत आसान है।
1:1 का मतलब है कि किसी चीज की तस्वीर सेंसर पर उसके असली आकार के बराबर बन सकती है। जैसे कोई चीज 10mm की है तो सेंसर पर उसकी image भी लगभग 10mm की बनेगी। इसे ही life-size या 1:1 कहा जाता है।
1:2 में सेंसर पर image असली subject के आधे आकार की बनेगी, जबकि 2:1 में image subject के असली आकार से दोगुनी बड़ी बनेगी।
इसलिए केवल लेंस पर Macro लिखा देखकर यह न मानें कि वह 1:1 मैक्रो ही होगा।
कुछ zoom lens बहुत पास से focus कर लेते हैं और उन पर Macro लिखा मिलता है, लेकिन उनका magnification 1:3 या 1:4 भी हो सकता है।
लेंस खरीदते समय उसका maximum magnification ratio जरूर देखें।
इस प्रकार के मैक्रो लेंस अलग-अलग focal length में मिलते हैं।
बाजार में करीब 30-35mm से लेकर 200mm तक के विकल्प देखने को मिल जाते हैं।
Nikon के भी 35mm, 50/60mm, 85mm, 105mm और 200mm जैसे macro lens रहे हैं।
| फोकल लेंथ | किस काम में उपयोगी |
|---|---|
| 35–60mm के आसपास | ऐसे मैक्रो लेंस में subject के काफी पास जाना पड़ सकता है। सिक्के, घड़ी, खाना, छोटी वस्तुएं और दूसरी निर्जीव चीजों की close-up photography के लिए ये अच्छे रहते हैं। |
| 90–105mm के आसपास | इसमें subject से थोड़ी ज्यादा दूरी रखकर फोटो खींच सकते हैं। फूल, पत्तियां, पौधे और कीड़े-मकोड़ों के लिए यह range काफी उपयोगी है। |
| 150–200mm के आसपास | अगर किसी कीड़े या छोटे जीव का close-up लेना हो और उसके बहुत पास न जाना चाहें तो लंबा macro lens काम आता है। इसमें दूर रहकर भी subject को बड़ा दिखाया जा सकता है। |
यहां एक चीज समझना जरूरी है। फोकल लेंथ बढ़ने का मतलब यह नहीं कि हर 100mm macro ठीक एक फुट दूर से और हर 200mm macro किसी तय दूरी से focus करेगा। यह दूरी हर lens में अलग होती है।
छोटी focal length वाले macro में अक्सर subject के ज्यादा पास जाना पड़ता है।
इससे कीड़ा उड़ सकता है या lens की वजह से subject पर रोशनी कम पड़ सकती है।
90–105mm या उससे लंबा macro इसी वजह से insects और छोटे जीवों की photography में सुविधाजनक हो सकता है।
मैक्रो लेंस के फायदे
- बहुत पास जाकर छोटी-छोटी चीजों की बारीकियां साफ दिखाई देती हैं।
- किसी छोटे से subject को भी फोटो में काफी बड़ा दिखाया जा सकता है।
- फूल, कीड़े, jewellery, छोटे products, पत्तियों की बनावट जैसी चीजों की photography के लिए यह बहुत उपयोगी है।
मैक्रो लेंस की सीमायें
- बहुत पास से फोटो लेते समय फोकस का हिस्सा काफी कम रह जाता है। थोड़ा सा आगे-पीछे होने पर फोटो धुंधली हो सकती है।
- अच्छी फोटो के लिए रोशनी और सही फोकस पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देना पड़ता है।
- असली 1:1 macro lens आम close-up lens की तुलना में महंगा हो सकता है।
6. फिश आई कैमरा लेंस | Fish Eye Camera Lens

जैसा नाम वैसा काम |
फिश आई का मतलब है मछली की आँख |
जिस तरह से मछली बहुत ही चौड़ा देख सकती है उसी तरह से फिश आई कैमरा लेंस का फील्ड ऑफ़ व्यू बहुत ही चौड़ा होता है |
अब आप पूछेंगे कि कि भई……. चौड़ा फील्ड ऑफ़ व्यू तो अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस में भी होता है तब इसमें क्या ख़ास है?
माना कि एक अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस काफी चौड़ा फील्ड ऑफ़ व्यू दिखाता है पर फिश आई लेंस से खींची हुई तस्वीर के कोने घुमावदार होते हैं जिसे एज डिसटॉर्शन भी कहते हैं (ऊपर तस्वीर देखें) |
एक अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस में एज डिसटॉर्शन को रोकने के लिए लेंस के भीतर एक स्पेशल लेंस एलिमेंट को लगाया जाता है जिसे अस्फेरिकल लेंस एलिमेंट कहते हैं
फिश आई कैमरा लेंस को बहुत ही ख़ास तरह की फोटोग्राफी में इस्तेमाल किया जाता है जहाँ एक बड़े पैनोरमिक व्यू की आवश्यकता होती है |
ये लेंस 180 डिग्री तक के एंगल के फोटो खींच सकते हैं और इसलिए इनके कोने घुमावदार हो जाते हैं |
यदि आपके पास एक गोप्रो कैमरा है तब भी आप अपने फोटो और वीडियो में फिश आई इफ़ेक्ट पा सकते हैं क्योंकि इन कैमरों का फोकल लेंथ काफी कम होता है |
आम तौर पर 4 – 18 mm फोकल लेंथ के फिश आई लेंस काफी चलन में हैं जिनमें 8mm तो बहुत ही मशहूर है |
फिश आई कैमरा लेंस के फायदे
- बहुत चौड़ा फील्ड ऑफ़ व्यू
- छोटी जगह पर भी सब्जेक्ट पूरे फ्रेम में
- प्राइम और ज़ूम में उपलब्ध
- बड़े अपर्चर में उपलब्ध
फिश आई कैमरा लेंस की सीमायें
- कुछ ख़ास तरह की फोटोग्राफी के लिए ही
- तस्वीर के कोने पर घुमाव (डिसटॉर्शन)
7. टिल्ट शिफ्ट लेंस | Tilt Shift Lens

फोटोग्राफी में अगर हम परिपेक्ष्य यानि पर्सपेक्टिव की बात करें तब साधारण कैमरा लेंस में लेंस और सेंसर की स्थिति आमतौर पर एक-दूसरे के समानांतर रहती है |
पर क्या हो अगर आपका लेंस ही थोड़ा झुक या खिसक सके?
यहीं टिल्ट-शिफ्ट लेंस काम आता है |
इस लेंस में दो अलग तरह की movement होती हैं — Tilt और Shift |
Tilt में लेंस को थोड़ा झुकाया जाता है जबकि Shift में लेंस को सेंसर के सामने ऊपर-नीचे या दायें-बायें खिसकाया जा सकता है |
अब सवाल है कि इससे फायदा क्या होता है?
मान लीजिये आप किसी बहुत ऊँची बिल्डिंग की फोटो ले रहे हैं | आम लेंस से पूरी बिल्डिंग को फ्रेम में लेने के लिए आपको कैमरा ऊपर की ओर झुकाना पड़ता है |
ऐसा करते ही बिल्डिंग की दोनों सीधी दीवारें ऊपर जाकर एक-दूसरे की तरफ झुकती हुई दिखाई देने लगती हैं |
Shift की मदद से कैमरे को सीधा रखते हुए लेंस को ऊपर खिसकाया जा सकता है |
इससे बिल्डिंग फ्रेम में भी आ जाती है और उसकी खड़ी रेखाओं को सीधा रखने में भी मदद मिलती है |
इसी कारण टिल्ट-शिफ्ट लेंस का इस्तेमाल खासकर आर्किटेक्चरल फोटोग्राफी में काफी होता है |
Shift का इस्तेमाल कई फोटो लेकर उन्हें जोड़कर पैनोरमा बनाने में भी किया जा सकता है |
अब बात आती है Tilt की |
Tilt करने पर लेंस के focus की दिशा बदली जा सकती है |
साधारण लेंस में focus का क्षेत्र सेंसर के लगभग समानांतर रहता है, लेकिन लेंस को tilt करके इसे विषय के हिसाब से बदला जा सकता है |
इससे किसी landscape, product या दूसरे विषय में पास से दूर तक किसी खास हिस्से को focus में रखने में मदद मिल सकती है |
ध्यान रखें कि Tilt अपने-आप depth of field को बढ़ाता नहीं है | यह मुख्य रूप से focus की plane को बदलता है |
इसी Tilt को उलटे तरीके से इस्तेमाल करने पर तस्वीर के कुछ हिस्से जानबूझकर blur किये जा सकते हैं |
यही तरीका कई बार किसी असली शहर, रेलवे स्टेशन या सड़क को छोटे से खिलौने या miniature model जैसा दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है |
इसलिए अगर आपके मन में यह प्रश्न है कि टिल्ट-शिफ्ट लेंस का क्या काम है, तो आसान शब्दों में इसके मुख्य उपयोग हैं:-
ऊँची बिल्डिंग की झुकी हुई रेखाओं को सीधा दिखाने में |
आर्किटेक्चरल और इंटीरियर फोटोग्राफी में |
focus के क्षेत्र को अपनी जरूरत के हिसाब से बदलने में |
product और landscape photography में |
पैनोरमा बनाने में |
किसी असली दृश्य को miniature जैसा creative effect देने में |
टिल्ट-शिफ्ट लेंस किसी एक focal length में नहीं आते | अलग-अलग कंपनियों में 17mm, 19mm, 24mm, 45mm, 50mm, 85mm और 90mm जैसे कई विकल्प मिलते हैं |
आमतौर पर wide टिल्ट-शिफ्ट लेंस architecture और interior में ज्यादा काम आते हैं जबकि थोड़ी लंबी focal length वाले lens product, food और दूसरी close photography में उपयोगी हो सकते हैं |
टिल्ट-शिफ्ट लेंस के फायदे
- बिल्डिंग की फोटो लेते समय टेढ़ी दिखाई देने वाली सीधी लाइनों को काफी हद तक सही किया जा सकता है।
- इसमें फोकस का एरिया अपनी जरूरत के हिसाब से बदला जा सकता है।
- आर्किटेक्चर, बिल्डिंग और प्रोडक्ट फोटोग्राफी में यह लेंस काफी काम का होता है।
- इसकी मदद से ऐसा फोटो भी बनाया जा सकता है जिसमें असली जगह किसी छोटे मॉडल जैसी दिखाई देती है।
टिल्ट-शिफ्ट लेंस की सीमायें
- यह आम फोटोग्राफी के लिए जरूरी लेंस नहीं है। इसका इस्तेमाल कुछ खास तरह की फोटोग्राफी में ही ज्यादा होता है।
- यह लेंस काफी महंगे होते हैं।
- इसे सही तरीके से इस्तेमाल करना सीखने में थोड़ा समय लगता है।
- इसमें फोटो लेने से पहले फोकस और फ्रेम को ध्यान से सेट करना पड़ता है, इसलिए जल्दी-जल्दी फोटो लेने के लिए यह बहुत सुविधाजनक नहीं है।
फोटोग्राफी के हिसाब से कैमरा लेंस का इस्तेमाल | Types of Camera Lenses for Different Photography
नीचे दी गयी फोकल लेंथ केवल समझने के लिए हैं इन्हें कोई पक्का नियम न मानें।
एक ही लेंस का इस्तेमाल कई तरह की फोटोग्राफी में किया जा सकता है।
यहाँ दी गयी फोकल लेंथ Full Frame कैमरे को ध्यान में रखकर बतायी गयी है।
APS-C कैमरे में Crop Factor के कारण उसी लेंस से थोड़ा ज्यादा Zoom जैसा दिखाई देता है।
| फोकल लेंथ | कैमरा लेंस के प्रकार | कहाँ काम आता है |
|---|---|---|
| लगभग 8–15 mm | फिश आई लेंस | पैनोरमा, सिटीस्केप, लैंडस्केप, एक्शन, एब्सट्रैक्ट और क्रिएटिव फोटोग्राफी |
| लगभग 14–24 mm | अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस | लैंडस्केप, आर्किटेक्चर, इंटीरियर, रियल एस्टेट और रात के आसमान की फोटोग्राफी |
| लगभग 24–35 mm | वाइड एंगल लेंस | ट्रैवल, इंटीरियर, लैंडस्केप, आर्किटेक्चर, स्ट्रीट और ग्रुप फोटो |
| लगभग 35–70 mm | स्टैण्डर्ड लेंस | रोजमर्रा, ट्रैवल, स्ट्रीट, फैमिली और वेडिंग फोटोग्राफी |
| 50 mm | निफ्टी फिफ्टी लेंस | पोर्ट्रेट, स्ट्रीट, रोजमर्रा और कम रोशनी में फोटोग्राफी |
| जैसे 35, 50, 85, 135 mm | प्राइम लेंस | पोर्ट्रेट, स्ट्रीट, ट्रैवल और कम रोशनी में फोटोग्राफी |
| जैसे 18–55, 24–70, 55–200, 70–200 mm | ज़ूम लेंस | ट्रैवल, पोर्ट्रेट, वेडिंग, स्ट्रीट, कैंडिड, स्पोर्ट्स और वाइल्डलाइफ |
| लगभग 70–200 mm | टेलीफोटो लेंस | पोर्ट्रेट, वेडिंग, स्पोर्ट्स, इवेंट और कुछ हद तक वाइल्डलाइफ |
| लगभग 300 mm और उससे ज्यादा | सुपर टेलीफोटो लेंस | पक्षी, वाइल्डलाइफ, स्पोर्ट्स, एक्शन और चाँद की फोटोग्राफी |
| अलग-अलग, जैसे 50, 60, 85, 90, 100, 105, 200 mm | मैक्रो लेंस | फूल, कीड़े, ज्वेलरी, छोटी चीजें और बहुत पास से फोटो लेने के लिए |
| अलग-अलग, जैसे 17, 19, 24, 45, 50, 85 mm | टिल्ट-शिफ्ट लेंस | आर्किटेक्चर, प्रोडक्ट, मिनिएचर इफेक्ट और क्रिएटिव फोटोग्राफी |
एक बात यहाँ समझना जरूरी है
Prime Lens का मतलब 35mm, 50mm या 85mm नहीं है। जिस लेंस की फोकल लेंथ बदलती नहीं है, वह Prime Lens है। इसलिए 24mm भी Prime हो सकता है और 400mm भी।
इसी तरह Zoom Lens का मतलब 55–200mm नहीं होता। जिस लेंस में फोकल लेंथ बदली जा सकती है, वह Zoom Lens है। जैसे 18–55mm, 24–70mm, 70–200mm या 100–500mm सभी Zoom Lens हैं।
Macro Lens की पहचान भी केवल उसकी फोकल लेंथ से नहीं होती। असली Macro Lens बहुत पास से Focus कर सकता है और छोटी चीज को Sensor पर काफी बड़े आकार में दिखाता है। 1:1 Macro में चीज का आकार Sensor पर उसके असली आकार के बराबर तक हो सकता है।
यही कारण है कि ऊपर दी गयी फोकल लेंथ को केवल एक आसान Guide की तरह देखें।
आखिर में कौन सा लेंस आपके लिए सही है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप क्या फोटो खींचना चाहते हैं और आपका कैमरा Full Frame है या APS-C।
Kit Lens खराब होता है या पहले उसी से सीखें?
यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि नया कैमरा लेने के बाद उसके साथ मिलने वाला Kit Lens ठीक है या तुरंत दूसरा लेंस खरीद लेना चाहिए।
मेरी राय में शुरुआत में Kit Lens ही सबसे अच्छा है और यह खराब लेंस नहीं होता।
बस कुछ समय बाद आपकी जरूरत उससे ज्यादा हो सकती है।
18-55mm, 16-50mm जैसे Kit Lens में आपको अलग-अलग focal length पर फोटो लेने का मौका मिलता है।
कभी wide फोटो लें, कभी थोड़ा zoom करके। इससे धीरे-धीरे समझ आने लगता है कि आपको किस तरह की फोटो लेना ज्यादा पसंद है।
Kit Lens बदलने की जरूरत तब महसूस होती है जब उसकी कमी आपको खुद दिखने लगे।
जैसे—
- कम रोशनी में बार-बार ISO बहुत ज्यादा करना पड़ रहा हो।
- Portrait में ज्यादा background blur चाहिए।
- पक्षी या wildlife की फोटो के लिए zoom कम पड़ रहा हो।
- Landscape में और wide फोटो चाहिए।
- या बहुत छोटे subject की फोटो लेने के लिए lens पर्याप्त पास focus नहीं कर पा रहा हो।
तो पहले कमी समझें, फिर नया Lens लें “मेरे पास Kit Lens है, अब कौन सा Lens खरीदूँ?” इसका एक ही जवाब सबके लिए सही नहीं हो सकता। पहले यह समझिए कि आपका मौजूदा Lens आपको कहाँ रोक रहा है। जब यह बात साफ हो जाएगी, तभी अगला Lens चुनना भी आसान हो जाएगा। |
क्या पुराने DSLR के लेंस नए Mirrorless कैमरे पर चल सकते हैं?
कई बार हाँ।
अगर आपके पास पहले से DSLR के अच्छे लेंस हैं तो नया Mirrorless कैमरा लेने के बाद उन्हें तुरंत बेचने की जरूरत नहीं है।
सही adapter लगाकर कई पुराने लेंस नए कैमरे पर भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
जैसे Canon के EF और EF-S लेंस को उसके adapter की मदद से EOS R कैमरे पर लगाया जा सकता है।
इसी तरह Nikon के कई पुराने F-mount लेंस FTZ adapter के साथ Z series कैमरे पर चल जाते हैं।
लेकिन यहाँ एक बात ध्यान रखें। हर पुराना लेंस और हर adapter एक जैसा काम नहीं करता।
किसी लेंस में autofocus ठीक से काम कर सकता है तो किसी पुराने model में कुछ features सीमित हो सकते हैं।
इसलिए नया कैमरा लेने के बाद पुराने लेंस बेचने की जल्दी न करें।
पहले अपने लेंस का model देखें और यह पता करें कि सही adapter के साथ वह आपके नए कैमरे पर कितना काम करेगा।
लेंस खरीदने से पहले इन 10 बातों को जरूर देखें
आपके कैमरे का mount कौन सा है?
सबसे पहले यही देखें कि नया लेंस आपके कैमरे पर लगेगा भी या नहीं।आपका कैमरा APS-C है या Full Frame?
एक ही लेंस दोनों कैमरों पर अलग तरह का view दे सकता है।आप सबसे ज्यादा क्या फोटो खींचते हैं?
Portrait, Travel, Landscape, Wildlife या कुछ और? लेंस का चुनाव इसी से शुरू होना चाहिए।अभी वाले लेंस में आपको कमी कहाँ लग रही है?
क्या frame कम wide है? दूर की चीज पास नहीं आती? कम रोशनी में दिक्कत है? Background blur नहीं मिल रहा? पहले असली परेशानी समझिए।आपको Prime चाहिए या Zoom?
Prime लेंस में focal length तय रहती है, जबकि Zoom लेंस में आपको frame बदलने की ज्यादा सुविधा मिलती है।Stabilization आपके काम की है या नहीं?
अगर आप हाथ में कैमरा लेकर धीमी shutter speed या लंबे focal length पर फोटो लेते हैं तो यह काफी काम आ सकती है।लेंस का वजन भी जरूर देखें।
कागज पर बहुत अच्छा लेंस खरीदने का कोई फायदा नहीं अगर वह इतना भारी हो कि आप उसे यात्रा या फोटो खींचने जाते समय साथ ही न ले जाएँ।- Maximum aperture कितना है?
अगर low light, portrait या background blur जरूरी है तो f/number जरूर देखें। - Minimum focus distance कितना है?
अगर आप फूल, खाना, छोटी चीजें या close-up ज्यादा खींचते हैं तो यह काफी important है। - Filter size और future cost भी देखें।
बड़े lens में filters भी महंगे हो सकते हैं। अगर polarizer, ND filter वगैरह इस्तेमाल करना है तो यह पहले देख लें।
और यदि अभी भी confusion है तो फोटोग्राफी के लिए कौन सा कैमरा खरीदूं वाली मेरी बातचीत भी देखें।
और अंत में…
कैमरा लेंस एक ऐसा विषय है जिसमें अक्सर लोगों को काफी कनफ्यूजन रहता है, खासकर लेंस पर लिखे नंबर और मार्किंग को लेकर।
इस कैमरा लेंस गाइड को लिखने का हमारा मकसद यही है कि आपको लेंस से जुड़ी जरूरी बातें आसान भाषा में एक ही जगह मिल जाएं।
फोटोग्राफी में हर जरूरत के लिए अलग-अलग तरह के लेंस होते हैं। इसलिए कैमरा खरीदने के बाद लेंस भी अपनी जरूरत देखकर ही खरीदें।
जैसे अगर आपको वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी पसंद है तो आपके लिए एक अच्छा टेलीफोटो लेंस ज्यादा काम का होगा। वहीं पोर्ट्रेट, ट्रैवल या लैंडस्केप के लिए आपकी जरूरत अलग हो सकती है।
एक बात हमेशा ध्यान रखें। इंटरनेट पर किसी लेंस के आगे “Best Lens” लिखा देखकर तुरंत उसे खरीदने का फैसला न करें।
पहले देखें कि वह आपके कैमरे में लगेगा भी या नहीं, आपका कैमरा फुल फ्रेम है या क्रॉप सेंसर और सबसे जरूरी बात यह कि आपको उस लेंस की जरूरत किस काम के लिए है।
जो लेंस किसी दूसरे फोटोग्राफर के लिए बहुत अच्छा है, जरूरी नहीं कि वही आपके लिए भी सही हो।
हमें कमेंट करके जरूर बताएं कि आपको कैमरा लेंस के प्रकार पर यह जानकारी कैसी लगी और आप अभी कौन सा लेंस इस्तेमाल कर रहे हैं।
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Camera Lens FAQ
कैमरा में कौन सा लेंस होता है?
स्कूल में इसका आसान जवाब उत्तल लेंस यानी Convex Lens बताया जाता है। लेकिन आज के कैमरा लेंस में केवल एक लेंस नहीं होता। इसके अंदर कई छोटे-बड़े लेंस एलिमेंट होते हैं जो मिलकर रोशनी को कैमरा सेंसर पर सही तरह से फोकस करते हैं।
50mm लेंस APS-C कैमरा पर 75mm जैसा क्यों लगता है?
लेंस की फोकल लेंथ 50mm ही रहती है। वह बदलती नहीं है।
लेकिन APS-C सेंसर छोटा होता है, इसलिए वह पूरे दृश्य का थोड़ा छोटा हिस्सा रिकॉर्ड करता है। इसी वजह से देखने में ऐसा लगता है जैसे हम ज्यादा जूम वाली फोकल लेंथ इस्तेमाल कर रहे हों।
Nikon और Sony जैसे APS-C कैमरों में 50mm का दृश्य लगभग 75mm जैसा लग सकता है। Canon APS-C में यह करीब 80mm जैसा दिखाई दे सकता है।
क्या Full Frame लेंस Crop Sensor कैमरा पर लगा सकते हैं?
अधिकतर मामलों में हां, अगर कैमरे और लेंस का माउंट एक-दूसरे से मेल खाता हो।
लेंस की फोकल लेंथ नहीं बदलती, लेकिन छोटे सेंसर की वजह से फोटो का दिखाई देने वाला हिस्सा थोड़ा क्रॉप हो जाता है।
क्या APS-C लेंस Full Frame कैमरा पर लगा सकते हैं?
कुछ कैमरों में लगाया जा सकता है।
ऐसे में कैमरा अपने आप Crop Mode में जा सकता है और फोटो का रिजोल्यूशन कम हो सकता है। कुछ लेंस में फोटो के किनारों पर काला हिस्सा भी दिखाई दे सकता है।
इसलिए लेंस खरीदने या लगाने से पहले कंपनी की Compatibility जरूर देख लें।
क्या Kit Lens खराब होता है?
बिलकुल नहीं।
शुरुआत में Kit Lens बहुत काम का होता है। इसी से आपको समझ आता है कि आपको कौन सी फोकल लेंथ सबसे ज्यादा पसंद है और आप किस तरह की फोटोग्राफी ज्यादा करते हैं।
नया लेंस तब लें जब आपको बार-बार लगे कि Kit Lens आपकी किसी जरूरत को पूरा नहीं कर पा रहा है।
Beginner के लिए Prime Lens अच्छा है या Zoom Lens?
शुरुआत में Zoom Lens ज्यादा आसान रहता है क्योंकि एक ही लेंस में आपको कई फोकल लेंथ मिल जाती हैं।
कुछ समय इस्तेमाल करने के बाद आपको खुद समझ आने लगेगा कि आप सबसे ज्यादा किस फोकल लेंथ पर फोटो लेते हैं। उसके बाद जरूरत हो तो उस फोकल लेंथ का Prime Lens लिया जा सकता है।
अगर कैमरा में IBIS है तो क्या Lens IS या VR जरूरी है?
जरूरी नहीं।
कैमरा के अंदर मौजूद IBIS भी हाथ के हल्के कंपन को कम करने में मदद करता है।
लेकिन टेलीफोटो लेंस या कम रोशनी में हाथ से फोटो लेते समय लेंस में दिया गया Stabilization भी फायदा दे सकता है।
कुछ कैमरों में कैमरा और लेंस दोनों का Stabilization मिलकर काम करता है। यह सुविधा हर कंपनी और मॉडल में अलग हो सकती है।
असली Macro Lens की पहचान कैसे करें?
सिर्फ लेंस पर “Macro” लिखा देखकर फैसला न करें।
उसका Maximum Reproduction Ratio भी देखें।
अगर लेंस 1:1 का Reproduction Ratio देता है तो उसे आम तौर पर असली Life-size Macro माना जाता है।
Lens में mm का क्या मतलब है?
mm यानी मिलीमीटर लेंस की फोकल लेंथ बताता है।
कम mm वाला लेंस ज्यादा चौड़ा दृश्य दिखाता है।
ज्यादा mm वाला लेंस कम चौड़ा दृश्य दिखाता है और दूर की चीजें फ्रेम में बड़ी दिखाई देती हैं।
क्या पुराने DSLR Lens Mirrorless कैमरा पर चल सकते हैं?
कई पुराने DSLR लेंस सही Adapter की मदद से Mirrorless कैमरा पर चल जाते हैं।
लेकिन Auto Focus, Stabilization और दूसरी सुविधाएं हर लेंस और कैमरा में एक जैसी काम करें, यह जरूरी नहीं है।
इसलिए Adapter या पुराना लेंस खरीदने से पहले कंपनी की Compatibility List जरूर देख लें।






Dear sir bahut achha laga read karne se
Sir koi esha site ho
आभार आपका | विजिट करते रहे
Yes no doubt it’s easier to understand for them who are from Hindi medium
Thanks and keep visiting