मोबाइल से बेहतर ट्रैवल वीडियो कैसे शूट करें? आसान गाइड

Last Updated on September 19, 2026 by अनुपम श्रीवास्तव

अपनी यात्रा के दौरान एक बढ़िया वीडियो शूट करना तो मुश्किल काम नहीं है जब जेब में स्मार्टफोन हो।

क्या आप भी कुछ ऐसा ही सोचते हैं?

आप कहेंगे कि भई इसमें क्या है, जब हम कहीं यात्रा पर गए तो वीडियो शूटिंग करने के लिए बस रिकॉर्ड का बटन ही तो दबाना है और बाकी काम तो मोबाइल फोन कर ही लेगा।

लेकिन रिकॉर्ड बटन क्लिक करते ही कहीं वीडियो में सब्जेक्ट आउट ऑफ़ फोकस हो जाता है तो कहीं बार-बार फोकस हंटिंग की समस्या आ जाती है।

कहीं रंग एकदम से धुले-धुले लगते हैं तो कहीं वीडियो बिलकुल अँधेरा हो जाता है और भी न जाने क्या-क्या परेशानियां सामने आने लगती हैं।

अब आप सोचेंगे कि अपने कैमरा फोन से एक बेहतर ट्रैवल वीडियो शूट करना क्या इतना कठिन है?

जी! बिलकुल नहीं।

इसके लिए ही आप इस स्थान पर आये हैं।

क्या आप जानना चाहेंगे कि वे कौन से तरीके हैं जिनकी मदद से आप किसी साधारण से ट्रैवल वीडियो को और भी बेहतर बना सकते हैं?

आज के फोन पहले से कहीं बेहतर वीडियो बना लेते हैं, पर एक बात अभी भी वैसी ही है।

कहानी, रोशनी, आवाज और कैमरा पकड़ने का तरीका फोन अपने आप नहीं सीख सकता है।

इन चार चीजों की तनिक समझ आ गयी तो साधारण फोन से भी आपकी यात्रा वीडियो काफी निखर सकती है।

तो चलिए उन्हीं 12 बातों को एक-एक कर समझते हैं।

साथ ही उन सवालों की भी बात करेंगे जो आज मोबाइल से वीडियो बनाते समय अक्सर परेशान करते हैं।

  • 4K में शूट करें या 1080p में?
  • 30 FPS ठीक रहेगा या 60 FPS?
  • फोन खड़ा रखें या आड़ा?
  • हर वीडियो के लिए गिम्बल जरूरी है या हाथ से भी अच्छा वीडियो बनाया जा सकता है?
  • और अगर 4K वीडियो एडिट करते समय मोबाइल या कंप्यूटर अटकने लगे तब क्या करें?

इन सभी बातों को आगे आसान उदाहरणों के साथ समझेंगे।

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ट्रैवल वीडियो शूट करने के लिए जरूरी मोबाइल गैजेट और ऐप्स

travel video shoot

आगे बढ़ने से पहले हम कुछ ज़रूरी मोबाइल एसेसरीज के बारे में जान लेते हैं जो एक बेहतर ट्रैवल वीडियो शूट करने में आपकी सहायता करेंगे।

वैसे देखा जाये तो वीडियो शूटिंग के लिए बाजार में लेंस, माइक, स्मार्टफोन रिग, गिम्बल और न जाने कितने उपकरण मौजूद हैं।

पर इसका यह मतलब बिलकुल नहीं है कि बढ़िया ट्रैवल वीडियो बनाने के लिए आपको इन सभी चीजों को खरीदना ही पड़ेगा।

आप शुरुआत उसी फोन से करें जो आपके पास पहले से है। बाद में जहाँ पर सच में कमी महसूस हो, वहीं कोई नया सामान जोड़ें।

1. कैमरा फोन

अच्छी यात्रा वीडियो के लिए अलग से वीडियो कैमरा खरीदना जरूरी नहीं है।

आपके पास जो फोन है, पहले उसी के कैमरे को ठीक से समझें।

सिर्फ अधिक मेगापिक्सेल होने से वीडियो अच्छी नहीं हो जाती है बल्कि फोकस, रोशनी, कैमरे की स्थिरता और आवाज जैसी बातें भी उतनी ही जरूरी है।

एक छोटी-सी बात और।

शूटिंग शुरू करने से पहले कैमरे का लेंस जरूर साफ कर लें।

आपका फोन दिन भर जेब और हाथ में रहता है इसलिए अगर लेंस पर उंगलियों के निशान आ जाएं तो बढ़िया जगह पर शूट की गयी वीडियो भी धुंधली-सी लग सकती है।

2. कैमरा ऐप

यदि आपके मोबाइल कैमरे में मैन्युअल कंट्रोल की सुविधा है तब तो ठीक है, नहीं तो जरूरत पड़ने पर आप मैन्युअल कैमरा ऐप का प्रयोग कर सकते हैं।

लेकिन यदि आप अभी शुरुआत कर रहे हैं तब फोन का अपना कैमरा ऐप ही काफी है।

पहले उसी में फोकस लॉक करना, एक्सपोजर बदलना, फ्रेम रेट चुनना और स्टेबिलाइजेशन चालू करना सीखें।

अलग ऐप तभी लगाएं जब आपको फोन के अपने कैमरा ऐप से अधिक कंट्रोल चाहिए।

एंड्राइड के लिए Open Camera और Cinema FV-5 Lite अभी भी उपयोगी विकल्प हैं।

अधिक कंट्रोल चाहने वालों के लिए Filmic Pro भी उपलब्ध है।

ध्यान रहे कि हर ऐप की सभी सुविधाएँ हर फोन में काम करें, यह जरूरी नहीं है।

इसलिए किसी यात्रा पर निकलने के बाद प्रयोग करने के बजाय ऐप को पहले घर पर ही जांच लें।

वरना जिस समय सामने बढ़िया सीन होगा, उस समय आप कैमरे की सेटिंग ही ढूंढते रह जायेंगे।

3. ट्राईपोड वाली सेल्फी स्टिक

सेल्फी स्टिक
स्मार्टफोन के साथ मेरी सेल्फ़ी स्टिक

रूकिये! इसकी ज़रूरत केवल वीडियो सेल्फी लेने के लिए नहीं है बल्कि किसी शॉट को तनिक स्थिरता देने के लिए भी है।

किसी भी शॉट को लेते समय हाथ हिल सकते हैं जिससे आपकी ट्रैवल वीडियो बिगड़ने की समस्या रहेगी।

स्टिक का प्रयोग करते समय इससे काफी हद तक बचा जा सकता है।

सेल्फी स्टिक को पूरा खींच कर अपनी यात्रा वीडियो की शूटिंग करने पर ऐसा लगेगा कि आप तनिक ऊपर से शूट कर रहे हैं जिससे वीडियो में एक अलग प्रभाव आयेगा।

यदि आपने ट्राईपोड वाली स्टिक ली है तब तो पूछना ही क्या।

स्मार्टफोन को ट्राईपोड पर लगाकर आप खुद की वीडियो भी शूट सकते हैं।

अब सवाल आता है कि क्या इसके लिए गिम्बल खरीदना जरूरी है?

जी नहीं।

गिम्बल चलते हुए शॉट को काफी स्मूथ बना सकता है, लेकिन हर यात्रा में उसे साथ लेकर घूमना भी आसान नहीं है।

पहले फोन के स्टेबिलाइजेशन ऑन कर के और सही पकड़ के शूट करके देखें। यदि आपको फिर भी अधिक स्थिर वीडियो चाहिए तभी गिम्बल के बारे में सोचें।

4. वीडियो एडिटिंग ऐप या सॉफ्टवेयर

यात्रा वीडियो के लिए एडिटिंग भी जरूरी है क्योंकि इसी समय आप बेकार शॉट हटाकर पूरी कहानी को सही क्रम में लगा सकते हैं।

आपको शुरुआत में किसी भारी-भरकम सॉफ्टवेयर की जरूरत नहीं है।

सबसे पहले आप साधारण कटिंग, आवाज ठीक करना और जरूरत भर का रंग सुधारना सीखें।

यहाँ जरूरी बात यह है कि कौन-सा शॉट रखना है और कौन-सा निकाल देना है।

यदि आप Windows पर काम करते हैं तब Microsoft का Clipchamp भी साधारण वीडियो एडिटिंग के लिए एक विकल्प है।

स्मार्टफोन में ही वीडियो एडिट करने वालों के लिए Kinemaster अभी भी उपलब्ध है।

Filmora और Adobe Premiere Pro जैसे सॉफ्टवेयर भी हैं, लेकिन शुरुआत में इनके पीछे भागने की जरूरत नहीं है।

आप कौन-सा सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करते हैं, इससे अधिक जरूरी यह है कि वीडियो देखते समय आपकी कहानी साफ समझ में आये।

ध्यान रखें कि महंगा कैमरा, गिम्बल और भारी एडिटिंग सॉफ्टवेयर अपने आप बढ़िया ट्रैवल वीडियो नहीं बना सकते हैं।

पहले अपने फोन को ठीक से इस्तेमाल करना सीखें और जरूरत महसूस होने पर ही एक-एक करके बाकी सामान जोड़ें।

वीडियो शूट करने से पहले ये 6 चीजें जांच लें

भई, कई बार समस्या कैमरे की नहीं बल्कि अपनी तैयारी की होती है। इसलिए रिकॉर्ड का बटन दबाने से पहले आधा मिनट निकाल कर कुछ छोटी चीजें जरूर जांच लें।

1. कैमरे का लेंस साफ कर लें

जेब में रहने से फोन के कैमरे पर उंगलियों के निशान और धूल लगना आम बात है।

गंदे लेंस से वीडियो धुंधला दिख सकता है और रोशनी के आसपास अजीब सा फैलाव भी आने लगता है। इसलिए शूटिंग से पहले लेंस को किसी साफ मुलायम कपड़े से पोंछ लें।

2. बैटरी और पावर बैंक देख लें

वीडियो रिकॉर्डिंग में फोटो के मुकाबले बैटरी तेजी से खर्च होती है।

अगर आपको पूरा दिन घूमना है तब घर से निकलते समय फोन पूरा चार्ज रखें और हो सके तो पावर बैंक भी साथ ले लें।

3. फोन में खाली जगह जरूर देखें

वीडियो, खासकर 4K में शूट करने पर काफी जगह घेर सकता है।

ऐसा न हो कि किसी शानदार जगह पर पहुँचते ही फोन बता दे कि अब जगह ही नहीं बची।

तो यात्रा से पहले ही आप पुरानी और बेकार फाइलें हटाकर पर्याप्त जगह खाली कर लें।

4. कॉल और नोटिफिकेशन से बचें

वीडियो शूट करते समय अचानक कॉल या बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन आपका ध्यान भटका सकते हैं।

जरूरत हो तो फोन का Do Not Disturb यानी परेशान न करें वाला विकल्प चालू कर लें। बस इतना ध्यान रखें कि जरूरी कॉल के लिए आपने क्या सेटिंग रखी है।

5. फोन खड़ा रखना है या आड़ा, पहले तय करें

शूटिंग शुरू करने से पहले सोच लें कि वीडियो आखिर देखी कहाँ जाएगी।

टीवी या सामान्य YouTube वीडियो के लिए फोन आड़ा रखना अधिक ठीक रहेगा वहीं Reels या Shorts के लिए फोन खड़ा रखना सुविधाजनक है।

हर शॉट के बीच बार-बार दिशा बदलने से बाद में एडिटिंग के समय परेशानी हो सकती है।

6. दस सेकंड का नमूना वीडियो बना लें

रिकॉर्डिंग शुरू करने से पहले दस सेकंड का एक छोटा वीडियो बनाकर उसे देख और सुन लें।

कई बार तस्वीर तो ठीक आती है पर हवा के कारण आवाज खराब हो रही होती है तो कभी फोकस ठीक नहीं बैठ रहा होता है।

इतनी सी जांच आपको बाद में यह कहने से बचा सकती है कि काश, यह बात पहले देख ली होती।

मोबाइल से ट्रैवल वीडियो कैसे शूट करें? 12 आसान टिप्स

सभी जरूरी चीजें तैयार करने के बाद अब बस यात्रा का वीडियो शूट करना ही बाकी रह गया है।

तो फिर देर किस बात की, आइये शुरू करते हैं।

टिप #1 : अपने कैमरा फोन को ठीक से समझें

आप कहेंगे कि इसमें क्या समझना है, अरे हमारे फोन को कोई हमसे बेहतर जान सकता है क्या?

हम यहाँ बात कर रहे हैं स्मार्टफोन के कैमरा फीचर के बारे में।

मोबाइल फोन से ट्रिप की वीडियो शूट करते समय हम लोग बिना कोई सेटिंग देखे बस रिकॉर्ड का बटन दबा देते हैं।

लो जी! हो गयी वीडियो रिकॉर्डिंग।

यह ध्यान रखें कि इस तरह से आप साधारण फुटेज तो ले पाएंगे, पर यात्रा वीडियो को तनिक बेहतर बनाने के लिए आपको अपने कैमरे को थोड़ा समझना पड़ेगा।

शटर, अपर्चर, ISO, वाइट बैलेंस और फोकस जैसे मूलभूत शब्दों की थोड़ी जानकारी रखें।

इसके साथ ही फ्रेमिंग और कम्पोजीशन का अभ्यास भी करें।

बेहतर कम्पोजीशन के लिए सबसे पहले यह देखें कि आपके सब्जेक्ट के पीछे क्या है।

मान लीजिए आप किसी किले के सामने अपने साथी की वीडियो बना रहे हैं और पीछे बिजली का खंभा सिर के ऊपर से निकलता हुआ दिखाई दे रहा है।

तो ऐसे में कैमरा बदलने की जरूरत नहीं है, बस थोड़ा सा अपना स्थान या शूटिंग एंगल बदलें।

कभी मोबाइल को तनिक ऊपर रखें, कभी नीचे और कभी थोड़ा दायें या बायें जाकर देखें।

कई बार केवल दो कदम चलने से ही पूरा फ्रेम बेहतर दिखाई देने लगता है।

रूल ऑफ थर्ड्स का प्रयोग करें

how to shoot video with phone

बेहतर फ्रेमिंग के लिए रूल ऑफ थर्ड्स का प्रयोग कर सकते हैं।

अपने मोबाइल कैमरे में ग्रिड लाइन का विकल्प चालू करें।

आपके स्क्रीन पर दो आड़ी और दो खड़ी रेखाएँ दिखाई देंगी, जिनसे पूरा फ्रेम नौ भागों में बंट जायेगा।

आपको हर बार सब्जेक्ट को बिलकुल बीच में रखना जरूरी नहीं है।

कई बार इन रेखाओं के मिलने वाले बिंदुओं के आसपास सब्जेक्ट रखने पर फ्रेम अधिक संतुलित और देखने में अच्छा लगता है।

इसे कोई पक्का नियम न समझें। जहाँ बीच में रखा सब्जेक्ट अच्छा लग रहा हो, वहाँ केवल रूल ऑफ थर्ड्स के चक्कर में उसे किनारे करने की जरूरत भी नहीं है।

पीछे वाले मुख्य कैमरे से शूट करें

एक बात और, जहाँ संभव हो मोबाइल के पीछे वाले मुख्य कैमरे से वीडियो शूट करें।

अधिकतर फोन में पीछे वाला मुख्य कैमरा सामने वाले कैमरे से बेहतर नतीजा देता है। खासकर यात्रा के दृश्य, इमारतें, बाजार या प्राकृतिक नजारे शूट करते समय इसे प्राथमिकता दें।

सामने वाला कैमरा तब बहुत काम का है जब आप खुद कैमरे की ओर देखकर अपनी यात्रा के बारे में बात कर रहे हों।

हर कैमरा फोन का एक अलग व्यक्तित्व है, इसलिए पहले आप उसे समझें तब काम पर लगायें।

किस रोशनी में उसका वीडियो अच्छा आता है, रात में कहाँ नॉइज बढ़ने लगता है और किस कैमरे से बेहतर रंग मिलते हैं, यह थोड़े अभ्यास से ही समझ में आता है।

इस प्रकार से आप अपने कैमरा फोन की ताकत और कमजोरियों के बारे में अच्छे से जान पाएंगे।

टिप # 2 : फोन खड़ा रखें या आड़ा? पहले तय करें वीडियो कहाँ देखेंगे

मैंने अक्सर लोगों को देखा है कि फोन से वीडियो शूट करते समय अपना फ़ोन खड़ा ही रखते हैं और यही हमारी आदत बन जाती है।

किसी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपलोड करने के लिए ऐसे वीडियो तो ठीक हैं पर यदि उन्हें आप टीवी या कंप्यूटर पर देखेंगे तब किनारों पर खाली जगह दिखाई दे सकती है।

पहले मैं लगभग हर यात्रा वीडियो को आड़े यानी लैंडस्केप में शूट करने की सलाह देता था पर अब यह नियम हर जगह सही नहीं बैठता।

आज पहले यह तय करना ज्यादा जरूरी है कि आपकी वीडियो आखिर देखी कहाँ जाएगी।

यदि आप लंबी YouTube वीडियो, टीवी या कंप्यूटर के लिए बना रहे हैं तो 16:9 फॉर्मेट में फोन को आड़ा यानि लैंडस्केप मोड में रखकर शूट करना आसान रहता है।

वहीँ अगर आपको वीडियो केवल Shorts या Reels के लिए बनानी है तो फोन खड़ा रखकर 9:16 फॉर्मेट में ही बनाना बेहतर रहेगा।

YouTube पर अब तीन मिनट तक के खड़े या चौकोर वीडियो भी Shorts में आ सकते हैं।

एक ही यात्रा से लंबी वीडियो और Shorts दोनों बनाने हों तब?

अब आप पूछेंगे कि एक ही यात्रा से लंबी YouTube वीडियो भी बनानी है और Shorts भी, तब क्या करें?

मेरे हिसाब से महत्वपूर्ण सीन को संभव हो तो दो बार शूट करें। एक बार फोन आड़ा रखकर और दूसरी बार खड़ा रखकर।

हर आड़े शॉट को बाद में काटकर खड़ा बनाना हमेशा अच्छा परिणाम नहीं देता।

मान लीजिए आप किसी मंदिर, महल या ऊंची इमारत को शूट कर रहे हैं। आड़े वीडियो को 9:16 में काटते ही इमारत का ऊपरी हिस्सा या आसपास का दृश्य गायब हो सकता है।

अगर किसी क्षण को दोबारा शूट करना संभव न हो तो थोड़ा चौड़ा फ्रेम रखें।

मुख्य सब्जेक्ट को किनारे से बिल्कुल चिपका कर न रखें ताकि बाद में जरूरत पड़ने पर वीडियो को खड़ा या चौकोर काटने की थोड़ी गुंजाइश बनी रहे।

टिप # 3 : अपने ट्रैवल वीडियो की कहानी पर विशेष ध्यान दें

यात्रा वीडियो कैसे शूट करें

यात्रा वीडियो शूट करते समय यह ध्यान रखें कि किसी जगह को दिखाने से भी जरूरी है उससे जुड़ी हुई कहानी को दिखाना।

उदाहरण के लिए सिर्फ ताजमहल को शूट करने से बेहतर है कि आप यह भी दिखाएं कि उस स्थान पर आप कैसे पहुंचे, किससे मिले और वहां आपने क्या-क्या किया।

ध्यान दें : यात्रा की वीडियो को और भी रोचक बनाने के लिए सफर के दौरान हुई कुछ मजेदार घटनाओं, खान-पान और परेशानियों को भी कहानी में जोड़ें।

समय-समय पर आप मौसम का मिजाज़, भीड़ भरे बाज़ार और आसपास का वातावरण भी दिखा सकते हैं।

सीधा गंतव्य स्थान पर शूट करने से बेहतर है कि शुरुआत रेलवे स्टेशन या एअरपोर्ट से ही की जाये।

इसी प्रकार से आप अपने ट्रैवल वीडियो का अंत कोई स्मृति चिन्ह खरीदते हुए, यात्रा की फोटो देखते हुए या फिर अपनी यात्रा का अनुभव बताते हुए कर सकते हैं।

किसी स्थान पर जाने से पहले वहां की थोड़ी जानकारी इकट्ठी करें और हो सके तो यह भी सोच लें कि शुरुआत कहाँ से करनी है और अंत कैसे होगा।

आपको यहाँ पूरी पटकथा लिखना जरूरी नहीं है। बस कहानी का एक मोटा क्रम दिमाग में रहे तो आप बेवजह ढेर सारी क्लिप शूट करने से बच जाएंगे।

बेतरतीब क्लिप शूट करने से बेहतर है आप कहानी पर ध्यान दें। इससे आपकी यात्रा का वीडियो साधारण से और बेहतर बनेगा।

अगर आपको किसी जगह पहुँचकर समझ नहीं आ रहा कि क्या-क्या शूट करें?

तो बस अपनी जगह और वीडियो का प्रकार चुनें और हमारा Travel Video Shot Planner आपको जरूरी दृश्यों की आसान सूची तुरंत दे देगा।

अब सवाल है कि कौन-कौन से शॉट लें?

देखिये आपको हर जगह सब कुछ रिकॉर्ड करने की जरूरत नहीं है।

मान लीजिए आप ताजमहल देखने जा रहे हैं। स्टेशन या रास्ते से एक छोटा शॉट लें। फिर प्रवेश द्वार, दूर से पूरा ताजमहल और उसके बाद पास जाकर जाली, नक्काशी या किसी दूसरी रोचक चीज को दिखा सकते हैं।

इसी तरह किसी बाजार में हों तो पहले पूरा बाजार दिखाएं। उसके बाद दुकान, लोगों की गतिविधि, कोई खास सामान और फिर उसका नजदीकी शॉट लें।

कोशिश करें कि आपके पास जगह को दिखाने वाला एक चौड़ा शॉट हो। उसके बाद लोगों या किसी गतिविधि का मध्यम शॉट और फिर किसी रोचक चीज का नजदीकी शॉट ले सकते हैं।

चलती गाड़ी, पैदल चलते लोग या आपके अपने चलने का एक छोटा शॉट भी वीडियो में गति लाता है।

आसपास की असली आवाज भी कुछ समय के लिए जरूर रिकॉर्ड करें। मंदिर की घंटियां, बाजार की आवाज, समुद्र की लहरें या बारिश की ध्वनि आपकी वीडियो को उस जगह का असली अहसास देती हैं।

अंत में वापसी, विदाई या अपना छोटा सा अनुभव रिकॉर्ड कर सकते हैं।

बस इतना सा क्रम भी एडिटिंग के समय बहुत काम आता है।

घर पहुंचने के बाद आपको ऐसा नहीं लगेगा कि सैकड़ों क्लिप तो हैं, लेकिन कहानी शुरू कहाँ से करें।

टिप # 4 : मैन्युअल मोड का प्रयोग कर अपने ट्रैवल वीडियो को निखारें

मैन्युअल मोड का प्रयोग आपके ट्रैवल वीडियो में बहुत सुधार ला सकता है |

मोबाइल वीडियो शूट के दौरान बार-बार एक्सपोज़र, फोकस और वाइट बैलेंस का बदलना देखने में अच्छा नहीं लगता |

यदि आप वीडियोग्राफी में नए हैं तब मैन्युअल मोड का प्रयोग तनिक जानकारी के बाद ही करें |

पर इसका मतलब यह भी नहीं कि हर समय कैमरे की सभी सेटिंग खुद ही बदलनी हैं |

आजकल फोन का ऑटो मोड भी काफी अच्छा काम करता है तो  शुरुआत में आप केवल फोकस और एक्सपोज़र को संभालना ही सीख लें |

मान लीजिए आप किसी बाजार में वीडियो बना रहे हैं और सामने से अचानक तेज रोशनी आ गयी |

ऐसी स्थिति में कैमरा बार-बार एक्सपोज़र बदल सकता है और आपका चेहरा कभी बहुत उजला तो कभी अंधेरा दिखाई देने लगेगा |

ऐसे में पहले सब्जेक्ट पर टैप कर फोकस तय करें और यदि आपके कैमरे में सुविधा हो तो एक्सपोज़र भी लॉक कर दें |

मैं मोबाइल वीडियो शूट करने के लिए Cinema FV-5 या Filmic Pro का उपयोग करता हूँ |

कई बार ऐसा देखा जाता है कि वीडियो में रंग सीन और प्रकाश के हिसाब से अलग-अलग आते हैं जो देखने में बिलकुल भी अच्छे नहीं लगते |

यदि आपके कैमरा एप में वाइट बैलेंस लॉक करने की सुविधा है तब उसे वातावरण के हिसाब से तय कर सकते हैं |

इससे एक ही सीन में रंग बार-बार गर्म और ठंडे दिखाई देने की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है |

वीडियो के लिए 30 FPS या 60 FPS क्या रखें?

वीडियो फ्रेम रेट

सामान्य यात्रा वीडियो के लिए 30 FPS एक आसान और भरोसेमंद शुरुआत है |

यदि आप चलते वाहन, खेल, तेज एक्शन या किसी हिस्से को बाद में धीमा दिखाना चाहते हैं तब 60 FPS उपयोगी हो सकता है |

पर हर वीडियो को 60 FPS में शूट करने की जरूरत नहीं है |

कम रोशनी में कई फोन बेहतर वीडियो के लिए अपने आप फ्रेम रेट घटा भी सकते हैं, इसलिए रात में केवल अधिक FPS के पीछे भागना ठीक नहीं है |

फ्रेम रेट को विस्तार से समझना हो तो हमारा FPS क्या होता है वाला लेख देखें और यदि आप यह तय नहीं कर पा रहे कि किसी खास सीन को 24, 30 या 60 FPS में शूट करें तो हमारे FPS Selector की मदद ले सकते हैं | 

टिप # 5 : अपने ट्रिप की वीडियो के शॉट्स की लम्बाई सीमित रखें

यदि आपको केवल अपने परिवार के साथ बैठकर देखने वाली यात्रा वीडियो बनानी है तब तो ठीक है।

पर अगर आप अपनी यात्रा के वीडियो को सोशल मीडिया पर दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ साझा करना चाहते हैं तब हर शॉट को बेवजह लंबा खींचने से बचें।

आप सीन के हिसाब से अपने वीडियो शूट की योजना बनायें और अलग-अलग छोटी क्लिप्स में शूट करें।

मैं अपने वीडियो में 5 सेकंड की क्लिप्स लेना पसंद करता हूँ पर यह कोई पक्का नियम नहीं है।

अगर कोई बातचीत, लोक नृत्य, स्टेशन पर आती ट्रेन, सूर्यास्त या कोई ऐसा क्षण है जिसे पूरा देखना जरूरी है तब उसे थोड़ा लंबा रिकॉर्ड करें।

छोटी क्लिप रखने का मकसद केवल इतना है कि हर दृश्य बिना वजह खिंचता न रहे।

इस लिहाज़ से आपके पास बहुत सारी फुटेज तो हो जाएगी पर वो सभी एक जैसी नहीं रहेंगी।

आपके पास हर सीन और एक्शन के हिसाब से अलग फुटेज होगी और बाद में अधिक काट-छांट भी नहीं करनी पड़ेगी।

ऐसा करने से अपनी यात्रा की कहानी जोड़ना आसान होगा और आप अपने टूर का एक दिलचस्प वीडियो बना पाएंगे।

टिप # 6 : मोबाइल फोन को धीरे घुमाएँ और अलग अलग एंगल से शॉट लें

अपने पसंदीदा यात्रा स्थल पर पहुँचने के बाद अक्सर लोग क्या करते हैं?

बस मोबाइल कैमरा निकाला और दायें, बाएं, ऊपर, नीचे, यहाँ, वहां सब कुछ शूट करने लगते हैं जैसे सब कुछ वह अपने कैमरे में कैद कर लेना चाहते हों।

जब आप घर पहुँच कर उन वीडियो क्लिप्स को देखेंगे तो पाएंगे कि उनमें से बहुत सी किसी काम की नहीं हैं।

ऐसा इसलिए क्योंकि कहीं सब्जेक्ट आउट ऑफ़ फोकस है तो कहीं फ्रेम से कट गया है और कहीं कैमरा इतनी तेजी से घूमा है कि वीडियो देखने में ही अच्छा नहीं लग रहा।

आप ऐसा बिलकुल भी न करें।

कोई भी शॉट लेते समय कैमरे को धीरे धीरे घुमाएँ। बहुत तेज पैन करने पर आसपास की चीजें धुंधली या झटकेदार दिखाई दे सकती हैं।

अपने सभी शॉट आँख के लेवल से ही न लें और उनमें थोड़ी विविधता लायें।

कभी कैमरा थोड़ा नीचे रखें, कभी ऊपर से शॉट लें और कभी सब्जेक्ट के एक तरफ जाकर देखें। कई बार केवल जगह बदलने से ही साधारण सा दृश्य काफी अच्छा दिखने लगता है।

अलग अलग कोण पर शूट कर आप दर्शकों में अलग भाव पैदा कर सकते हैं जिससे वह देर तक वीडियो से जुड़े रहेंगे।

अधिक जानकारी के लिए आप हमारा कैमरा एंगल वाला पोस्ट देख सकते हैं।

एक छोटा तरीका और है जो एडिटिंग के समय काफी काम आता है।

रिकॉर्ड का बटन दबाने के बाद एक दो सेकंड कैमरा स्थिर रखें। इसके बाद पैन शुरू करें और शॉट खत्म करने से पहले फिर एक दो सेकंड रुकें।

मान लीजिए आप पहाड़ों का दृश्य शूट कर रहे हैं।

तब रिकॉर्ड दबाते ही तुरंत कैमरा घुमाना शुरू कर दिया तो बाद में शुरुआत का हिस्सा काटना मुश्किल हो सकता है।

अगर आप थोड़ा रुककर शूट करेंगे तो एडिटिंग करते समय आपको साफ जगह मिल जाएगी जहाँ आसानी से कट लगाया जा सकता है।

अब जब भी आप ऐसे समझ बूझ से शूट करेंगे तब आप पाएंगे कि साधारण यात्रा वीडियो भी बेहतर हो गयी है।

टिप # 7 : मोबाइल से यात्रा वीडियो शूट करते समय डिजिटल ज़ूम का प्रयोग कम करें

आज बहुत से फोन में एक से अधिक कैमरे दिए जाते हैं। इनमें मुख्य कैमरे के अलावा वाइड या टेलीफोटो कैमरा भी हो सकता है।

इसलिए अब यह कहना ठीक नहीं होगा कि हर स्मार्टफोन में केवल डिजिटल ज़ूम ही मिलता है।

लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि स्क्रीन पर उंगली फैलाकर जितना चाहें उतना ज़ूम करते जाएँ।

एक सीमा के बाद फोन तस्वीर के छोटे हिस्से को ही बड़ा करके दिखाने लगता है। ऐसी स्थिति में बारीकी कम दिखाई दे सकती है और वीडियो की गुणवत्ता भी गिर सकती है।

इसका संबंध केवल रेसोलुशन से ही नहीं है। रोशनी, फोन का कैमरा और आप कितना ज़ूम कर रहे हैं, इन सबका असर पड़ता है।

यदि आपके फोन में अलग टेलीफोटो कैमरा है तो 2x, 3x या 5x जैसे किसी निश्चित ज़ूम पर बेहतर परिणाम मिल सकता है।

यह हर फोन में अलग होता है इसलिए यात्रा पर निकलने से पहले अपने कैमरे को एक बार जरूर जाँच लें।

दिन में किसी दूर लगे बोर्ड या पेड़ को 1x, 2x और दूसरे उपलब्ध ज़ूम पर शूट करें। यही काम शाम या कम रोशनी में भी करके देखें।

आप खुद समझ जायेंगे कि आपका फोन किस ज़ूम तक अच्छी वीडियो बना रहा है और कहाँ से गुणवत्ता गिरने लगती है।

जहाँ तक हो सके रिकॉर्डिंग के बीच बार बार ज़ूम अंदर बाहर करने से बचें। इससे देखने वाले का ध्यान भी भटकता है और कई फोन में लेंस बदलते समय वीडियो का रूप थोड़ा बदल सकता है।

अगर जरूरत हो और जगह सुरक्षित हो तो आप खुद थोड़ा आगे जाकर दूसरा शॉट ले सकते हैं।

पर केवल शॉट अच्छा करने के चक्कर में पीछे चलते जाना ठीक नहीं है।

सड़क, पहाड़, घाट, नदी या भीड़ वाली जगह पर पहले अपनी सुरक्षा देखें फिर उसके बाद वीडियो।

टिप # 8 : बेहतरीन ट्रैवल वीडियो शूट करने के लिए अपने हाथों को स्थिर रखें

क्या आप और आपके दर्शक एक हिलती-डुलती यात्रा वीडियो देखना पसंद करेंगे?

आप का जवाब होगा, नहीं!

बात भी सही है, बार-बार हिलता हुआ वीडियो देखने में अच्छा नहीं लगता और कुछ देर बाद आँखों को भी खटकने लगता है।

पर इसके लिए हर बार रिग या गिम्बल खरीदना जरूरी नहीं है।

पहले अपने फोन की कैमरा सेटिंग में यह देखें कि उसमें ऑप्टिकल या इलेक्ट्रॉनिक इमेज स्टेबिलाइजेशन की सुविधा है या नहीं।

कई फोन में यह अपने आप काम करता है, जबकि कुछ में इसके लिए अलग स्टेबिलाइजेशन या एक्शन मोड दिया जाता है।

इमेज स्टेबिलाइजेशन के प्रयोग से वीडियो तनिक स्मूथ हो जाता है।

हाथ में फोन पकड़ कर वीडियो कैसे स्थिर रखें?

फोन को अपने शरीर के करीब रखें। आप हाथ जितना आगे फैलाएंगे, छोटी सी हलचल भी वीडियो में उतनी ही अधिक दिखाई देगी।

जहाँ तक हो सके फोन को दोनों हाथों से पकड़ें और अपनी कोहनियों को शरीर के पास रखें।

आपको सांस रोकने की जरूरत नहीं है बल्कि सामान्य और मद्धम गति से सांस लेते हुए आराम से शॉट लें।

पैन करते समय केवल हाथ घुमाने के बजाय अपने शरीर को धीरे-धीरे मोड़ें। इससे कैमरे की गति अधिक मुलायम रहती है।

रिकॉर्डिंग शुरू होने के बाद बार-बार कैमरे की सेटिंग में छेड़छाड़ न करें। पहले सेटिंग ठीक कर लें और फिर शॉट पूरा करें।

चलते हुए वीडियो बनाना हो तो बहुत लंबे कदम लेने के बजाय छोटे और हल्के कदम रखें। ऐसा करने से ऊपर-नीचे होने वाली हलचल कुछ कम हो जाती है।

गिम्बल कब काम का है?

अगर आपको चलते हुए लंबे शॉट लेने हैं, किसी व्यक्ति को चलते-चलते फॉलो करना है या बहुत मुलायम कैमरा मूवमेंट चाहिए तब गिम्बल काफी उपयोगी हो सकता है।

लेकिन गिम्बल लगाते ही हर वीडियो अपने आप स्थिर नहीं हो जाता।

मान लीजिए आप किसी किले की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए वीडियो बना रहे हैं। अगर कदम तेज और झटके वाले हैं तब गिम्बल के बाद भी वीडियो में ऊपर-नीचे की हलचल दिखाई दे सकती है।

इसलिए पहले फोन को ठीक से पकड़ना और चलते समय अपनी चाल को नियंत्रित करना सीखें।

साधारण यात्रा वीडियो के लिए कई बार फोन का अपना स्टेबिलाइजेशन और थोड़ी सी सही तकनीक ही पर्याप्त होती है।

टिप # 9 : अपने यात्रा वीडियो में आस-पास की आवाज़ें भी रिकॉर्ड करें

क्या आप अपने टूर की वीडियो में केवल बैकग्राउंड म्यूजिक का ही प्रयोग करते हैं?

क्या आप जानते हैं कि वीडियो में वास्तविकता लाने और रुचि बढ़ाने के लिए आस-पास की असली आवाज़ों का भी प्रयोग किया जा सकता है?

लोगों की बातचीत, झरने, नदी, बारिश, पक्षियों की आवाज़ या किसी बाजार की चहल-पहल आपकी यात्रा वीडियो को उस जगह का असली अहसास देती है।

मेरी राय में जहाँ कोई खास दृश्य मिले, वहाँ 10 से 15 सेकंड केवल आसपास की साफ आवाज़ भी रिकॉर्ड कर लें।

मान लीजिए आप समुद्र किनारे हैं। लहरों का एक छोटा सा शॉट उनकी असली आवाज़ के साथ देखने में कहीं अधिक अच्छा लगेगा, बजाय इसके कि हर जगह केवल बैकग्राउंड म्यूजिक चलता रहे।

इसी तरह किसी रेलवे स्टेशन की घोषणा, मंदिर की घंटी या किसी बाजार की हलचल भी बाद में वीडियो की कहानी को बेहतर बना सकती है।

अगर आप कैमरे के सामने बोलते हुए वीडियो बना रहे हैं तब माइक्रोफोन काफी मदद करता है।

पर यह ध्यान रखें कि केवल महंगा माइक्रोफोन लगा लेने से हवा की आवाज़ अपने आप खत्म नहीं हो जाती।

बाहर हवा तेज हो तो माइक्रोफोन पर हवा रोकने वाला फोम या फर वाला कवर लगाना उपयोगी होता है। माइक्रोफोन को भी जितना हो सके आवाज़ के स्रोत के पास रखें।

फोन के अपने माइक्रोफोन से रिकॉर्ड कर रहे हों तब यह भी देख लें कि फोन पकड़ते समय आपकी उंगली माइक के छेद को ढक तो नहीं रही है।

आवाज़ रिकॉर्ड करने के लिए यदि आपके पास माइक्रोफ़ोन नहीं है तब आप अपने इयरफ़ोन का भी प्रयोग कर सकते हैं।

हाँ, पहले एक छोटा सा नमूना रिकॉर्ड करके सुन जरूर लें। आपके इयरफ़ोन में माइक होना चाहिए और फोन उसे रिकॉर्डिंग के लिए पहचान भी रहा हो।

असली आवाज़ों के अलावा संगीत और साउंड इफेक्ट्स के लिए आप गूगल फ्री म्यूजिक लाइब्रेरी या bensound का प्रयोग कर सकते हैं।

बस किसी भी संगीत को लगाने से पहले उसका लाइसेंस जरूर देख लें। कुछ ट्रैक मुफ्त होते हुए भी वीडियो में उसका श्रेय देना जरूरी होता है।

टिप # 10 : ट्रैवल वीडियो में स्लो मोशन और टाइम लैप्स का सही इस्तेमाल करें

आजकल के कैमरा फोन बस साधारण वीडियो बनाने तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि ये बहुत आगे निकल चुके हैं।

अपनी यात्रा की वीडियो को तनिक अलग और रोचक बनाने के लिए आप स्लो मोशन और टाइम लैप्स का प्रयोग कर सकते हैं।

यह जरूर ध्यान दें कि इस प्रकार के शॉट्स को कब और कहाँ लेना है। हर जगह स्लो मोशन लगाने से वीडियो बेहतर नहीं हो जाती।

मान लीजिए झरने का पानी गिर रहा है, कोई पक्षी उड़ रहा है या फिर बच्चे समुद्र किनारे खेल रहे हैं। ऐसे दृश्यों में स्लो मोशन अच्छा लग सकता है।

स्लो मोशन के लिए 60, 120 या 240 FPS जैसे विकल्प फोन के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं। अधिक FPS पर वीडियो शूट करने से फाइल का आकार भी बढ़ सकता है, इसलिए केवल बड़ा नंबर देखकर सेटिंग न चुनें।

टाइम लैप्स वहाँ अधिक काम आता है जहाँ कोई बदलाव धीरे-धीरे हो रहा हो। जैसे सूरज ढलना, बादलों का चलना, सड़क पर बढ़ता यातायात या किसी जगह पर आती-जाती भीड़।

टाइम लैप्स बनाते समय फोन का स्थिर रहना बहुत जरूरी है। ट्राईपोड हो तो उसी पर रखें। इसके बाद फ्रेम ठीक करें और रिकॉर्डिंग शुरू करें।

टिप # 11 : हर बार सबसे अधिक रिज़ॉल्यूशन जरूरी नहीं, 1080p या 4K क्या चुनें?

यदि आपको परिवार की यात्रा, सामान्य YouTube वीडियो या फोन पर देखने के लिए अच्छी वीडियो बनानी है तब 1080p आज भी काफी है।

इसमें फाइल का आकार कम रहता है, स्टोरेज जल्दी नहीं भरता और एडिटिंग भी आसानी से हो जाती है।

मान लीजिए आप कई दिनों की यात्रा पर हैं और दिनभर छोटी-छोटी क्लिप शूट करनी हैं। ऐसे में हर शॉट 4K में लेने से फोन की जगह बहुत जल्दी भर सकती है।

यदि आपको अधिक बारीकी चाहिए या एडिटिंग के समय फ्रेम को तनिक काटने की गुंजाइश रखना चाहते हैं तब 4K वीडियो उपयोगी रहेगा।

बड़े टीवी या स्क्रीन पर देखने के लिए भी 4K का फायदा मिल सकता है।

पर एक बात ध्यान रखें।

4K में शूट करने भर से कोई वीडियो अपने आप बेहतर नहीं हो जाता।

यदि कैमरा हिल रहा है, फोकस गलत है या रोशनी खराब है तब 4K भी उस गलती को ठीक नहीं कर सकता।

4K वीडियो बनाते समय फोन गर्म क्यों होता है?

अधिक रिज़ॉल्यूशन और ऊंचे फ्रेम रेट पर लंबे समय तक वीडियो रिकॉर्ड करने से कुछ फोन गर्म हो सकते हैं।

तेज धूप में कैमरा लगातार चल रहा हो और फोन पहले से गर्म हो तब यह समस्या और जल्दी दिखाई दे सकती है।

इसलिए किसी लंबी यात्रा से पहले अपने फोन पर 10 से 15 मिनट वीडियो बनाकर देख लें कि वह गर्म तो नहीं हो रहा।

यदि शूटिंग के समय फोन बहुत गर्म हो जाये तब थोड़ी देर रिकॉर्डिंग रोक दें और फोन को सीधी धूप से हटा लें।

आप अनावश्यक ऐप बंद कर सकते हैं और जरूरत हो तो 4K की जगह 1080p पर वीडियो बनायें।

अगर फोन पहले से ही काफी गर्म हो तब उसे चार्ज करते हुए लंबी वीडियो रिकॉर्डिंग करने से भी बचें।

और हाँ, यात्रा में पावर बैंक साथ रखना समझदारी है।

पर बैटरी और स्टोरेज बचाने का सबसे आसान तरीका हर चीज को 4K और 60 FPS में रिकॉर्ड करना नहीं है।

केवल वही शूट करें जो आपकी यात्रा की कहानी में सच में काम आने वाला हो।

टिप # 12 : अपने ट्रिप की वीडियो को एडिट करें और सही लंबाई रखें

एडिटिंग करने से वीडियो की क्वालिटी में सुधार आ जाता है क्योंकि आप अपनी गलतियों और बेकार शॉट्स को आसानी से छांट सकते हैं।

हालांकि यह केवल एक दिन का काम नहीं है, पर समय के साथ साथ आप एडिटिंग करने में माहिर हो जायेंगे।

वीडियो एडिटिंग से पहले यह ध्यान रखें कि अपनी यात्रा वीडियो के माध्यम से आपको एक कहानी बयां करनी है।

एडिटिंग करते समय केवल उन्हीं शॉट्स को शामिल करें जो उस कहानी को आगे बढ़ाने में आपकी मदद करें।

हालांकि यह तनिक मुश्किल होता है क्योंकि हम लोग उन सभी शॉट्स को दिखाना पसंद करते हैं जिन्हें हमने खुद शूट किया होता है।

पर हर शॉट अच्छा होने के बावजूद वीडियो में जरूरी हो, ऐसा नहीं है। कई बार किसी पसंदीदा क्लिप को हटाने से पूरी वीडियो पहले से बेहतर लगने लगती है।

जहाँ तक हो सके अपने वीडियो में विविधता बनाये रखें।

एक ही मंदिर या पहाड़ के दस मिलते जुलते शॉट दिखाने से बेहतर है कि एक दूर का दृश्य, एक नजदीकी शॉट और आसपास की गतिविधियां दिखाई जाएं।

वीडियो एडिटिंग सॉफ्टवेयर में रंग और रोशनी सुधारने के विकल्प भी मिलते हैं और इनका प्रयोग जरूरत के हिसाब से करें।

दिलचस्प वीडियो के लिए बीच बीच में ट्रांजीशन का प्रयोग किया जा सकता है, पर हर दो क्लिप के बीच अलग प्रभाव डालने की जरूरत नहीं है।

साधारण कट कई बार सबसे अच्छा लगता है।

यात्रा वीडियो कितनी लंबी रखें?

इसका कोई एक तय समय नहीं है।

परिवार के साथ बैठकर देखने के लिए बनी यात्रा वीडियो थोड़ी लंबी हो सकती है। वहीं सोशल मीडिया के लिए बनाई गयी वीडियो में बेकार के हिस्से हटाकर सीधे काम की बात दिखाना अधिक बेहतर रहता है।

YouTube पर तीन मिनट तक की खड़ी या चौकोर वीडियो Shorts में आ सकती है। इसलिए एडिटिंग शुरू करने से पहले यह तय कर लें कि वीडियो आखिर देखी कहाँ जाएगी।

आपकी कहानी अगर दो मिनट में पूरी हो रही है तो उसे जबरदस्ती पांच मिनट तक खींचने का कोई फायदा नहीं है।

फोन में वीडियो ठीक चलता है, पर एडिटिंग में अटकता क्यों है?

कई बार फोन में रिकॉर्ड की गयी वीडियो आराम से चलती है, लेकिन उसे एडिटिंग सॉफ्टवेयर में डालते ही वह अटकने लगती है।

इसका एक कारण वीडियो का बदलता हुआ फ्रेम रेट भी हो सकता है।

कुछ मोबाइल वीडियो में हर सेकंड एक समान संख्या में फ्रेम रिकॉर्ड नहीं होते। इसे VFR (Variable Frame Rate) यानी बदलता हुआ फ्रेम रेट कहा जाता है।

आज के अच्छे एडिटिंग सॉफ्टवेयर ऐसी वीडियो को काफी हद तक संभाल लेते हैं इसलिए केवल VFR देखकर परेशान होने की जरूरत नहीं है।

लेकिन अगर आवाज और वीडियो का तालमेल बिगड़ रहा हो या क्लिप बार बार अटक रही हो, तब उसकी जानकारी जांचें।

जरूरत पड़ने पर वीडियो को एडिटिंग से पहले एक समान फ्रेम रेट यानी CFR (Constant Frame Rate) में बदला जा सकता है।

4K की भारी फाइल भी कमजोर फोन या कंप्यूटर पर एडिटिंग को धीमा कर सकती है।

ऐसी स्थिति में कम आकार की अस्थायी कॉपी पर एडिट करना भी एक अच्छा तरीका है। आखिर में असली 4K फाइल से ही वीडियो तैयार की जाती है।

फोन में रंग अच्छे हैं, पर कंप्यूटर पर फीके क्यों लगते हैं?

कई बार फोन में वीडियो के रंग बहुत अच्छे दिखाई देते हैं, लेकिन वही वीडियो कंप्यूटर या एडिटिंग सॉफ्टवेयर में फीकी या जरूरत से ज्यादा चमकीली लगने लगती है।

अगर आपने वीडियो HDR (High Dynamic Range) में रिकॉर्ड की है तो इसका कारण HDR और सामान्य SDR (Standard Dynamic Range) रंग व्यवस्था का अंतर हो सकता है।

ऐसा होने का मतलब यह नहीं है कि आपके मोबाइल कैमरे में कोई खराबी है।

आज के कई अच्छे एडिटिंग सॉफ्टवेयर HDR वीडियो को अपने आप ठीक ढंग से संभाल सकते हैं पर फिर भी प्रोजेक्ट और एक्सपोर्ट की रंग सेटिंग गलत होने पर रंग बदल सकते हैं।

यदि आप HDR की एडिटिंग से परिचित नहीं हैं तो साधारण यात्रा वीडियो के लिए SDR में शूट करना अधिक आसान रहेगा।

और अगर HDR में शूट करना चाहते हैं तो एडिटिंग शुरू करने से पहले यह जरूर जांच लें कि आपका प्रोजेक्ट HDR में बना है या SDR में।

मोबाइल से ट्रैवल वीडियो बनाते समय कुछ आम सवाल

Travel Video with camera phone

क्या अच्छे ट्रैवल वीडियो के लिए अलग वीडियो कैमरा जरूरी है?

नहीं। शुरुआत के लिए आपका फोन काफी है।

अलग कैमरा आपको बेहतर लेंस, कम रोशनी में अच्छी तस्वीर और अधिक नियंत्रण दे सकता है, पर खराब कहानी, हिलता हुआ फ्रेम और खराब आवाज को महंगा कैमरा भी अपने आप ठीक नहीं करेगा।

पहले अपने फोन से ठीक तरह से वीडियो बनाना सीखें। बाद में यदि आपको लगे कि फोन की कोई सीमा आपके काम में रुकावट बन रही है, तभी अलग कैमरे के बारे में सोचें।

30 FPS रखें या 60 FPS?

सामान्य यात्रा, बातचीत, बाजार, इमारत और रोजमर्रा के दृश्यों के लिए 30 FPS से शुरुआत कर सकते हैं।

तेज चलती गाड़ी, पानी, खेल या ऐसे दृश्य जिन्हें बाद में थोड़ा धीमा करना हो, वहाँ 60 FPS काम आ सकता है।

रात में केवल इसलिए 60 FPS न चुनें कि संख्या बड़ी है। कम रोशनी में कई फोन 30 FPS पर बेहतर नतीजा दे सकते हैं।

अलग-अलग फोन में इसका असर अलग हो सकता है, इसलिए यात्रा से पहले अपने फोन पर दोनों विकल्प एक बार जांच लें।

एक ही यात्रा से YouTube और Reels या Shorts दोनों कैसे बनाएं?

जहाँ संभव हो जरूरी दृश्य दो बार शूट करें। एक बार फोन आड़ा रखकर और एक बार खड़ा रखकर।

मान लीजिए आप किसी किले के मुख्य दरवाजे पर केवल दस सेकंड रुकने वाले हैं। अगर समय मिले तो उसी दृश्य का एक आड़ा और एक खड़ा शॉट ले लें।

अगर किसी दृश्य को दोबारा शूट करने का मौका नहीं है तो फ्रेम थोड़ा चौड़ा रखें और मुख्य व्यक्ति या वस्तु को बिल्कुल किनारे पर न रखें।

बाद में वीडियो काटते समय आपके पास थोड़ी जगह रहेगी।

क्या ट्रैवल वीडियो के लिए गिम्बल जरूरी है?

नहीं।

सामान्य यात्रा के छोटे शॉटों में फोन की अपनी स्टेबिलाइजेशन सुविधा, दोनों हाथ और सही तरीके से चलना ही काफी हो सकता है।

अगर आपको काफी देर चलते हुए बहुत मुलायम वीडियो चाहिए तब गिम्बल काम आता है।

सिर्फ इसलिए गिम्बल न खरीदें क्योंकि दूसरे लोग उसे इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले देखें कि आपकी वीडियो में सच में उसकी जरूरत है या नहीं।

4K में वीडियो बनाते ही फोन गर्म क्यों हो जाता है?

उच्च गुणवत्ता वाला वीडियो रिकॉर्ड करते समय फोन को लगातार बहुत काम करना पड़ता है।

ऊपर से तेज धूप, स्क्रीन की अधिक चमक, GPS, मोबाइल डेटा और कैमरा सभी साथ चल रहे हों तो फोन और जल्दी गर्म हो सकता है।

कुछ फोन गर्म होने पर अपने आप कैमरे की कुछ सुविधाएँ सीमित कर देते हैं।

अगर रिकॉर्डिंग रुक जाए या तापमान की चेतावनी दिखाई दे तो फोन को थोड़ी देर ठंडा होने दें।

ऐसी स्थिति में हर बार 4K या 60 FPS पर ही शूट करना जरूरी नहीं है।

रात में वीडियो की रोशनी बार-बार क्यों बदलती है?

रात में यह समस्या बहुत आम है।

मान लीजिए आप किसी नाइट मार्केट में शूट कर रहे हैं। कभी कैमरा तेज दुकान की लाइट देखता है और कभी अंधेरी गली। ऐसे में फोन बार-बार अपनी रोशनी बदलने की कोशिश करता है।

इससे वीडियो कभी बहुत चमकीला तो कभी अचानक अंधेरा लग सकता है।

अपने मुख्य सब्जेक्ट पर फोकस करें और जहाँ फोन में सुविधा हो वहाँ फोकस और एक्सपोजर लॉक कर दें।

रात में जरूरत से ज्यादा डिजिटल ज़ूम करने से भी वीडियो की गुणवत्ता खराब हो सकती है।

बाहर माइक लगाने के बाद भी हवा की आवाज क्यों आती है?

माइक लगाने का मतलब यह नहीं कि हवा की आवाज अपने आप गायब हो जाएगी।

अगर तेज हवा सीधे माइक पर लगे तो रिकॉर्डिंग में “फूँ-फूँ” जैसी आवाज आ सकती है।

ऐसे में छोटे विंड कवर का प्रयोग करें और माइक को हवा की सीधी दिशा से थोड़ा बचाकर रखें।

रिकॉर्डिंग शुरू करने से पहले पांच-दस सेकंड की आवाज सुन लेना बहुत काम की आदत है।

यात्रा वीडियो की जल्दी वाली चेकलिस्ट

अगर पूरे लेख में से केवल कुछ बातें याद रखनी हों तो ये रखिए।

1. कैमरे का लेंस साफ करें और बैटरी व स्टोरेज जांच लें।

2. पहले तय करें कि वीडियो खड़ी चाहिए या आड़ी।

3. पूरी जगह को एक ही लंबे शॉट में न समेटें। छोटे और अलग-अलग शॉट लें।

4. केवल जगह ही नहीं, वहाँ तक पहुँचने का रास्ता, लोग, छोटी-छोटी बातें भी रिकॉर्ड करें।

5. जरूरत होने पर फोकस और एक्सपोजर लॉक करें।

6. सामान्य वीडियो के लिए 30 FPS से शुरुआत कर सकते हैं। 60 FPS जरूरत के हिसाब से चुनें।

7. हर चीज को 4K में शूट करना जरूरी नहीं है।

8. फोन को दोनों हाथों से पकड़ें। गिम्बल तभी लें जब सच में उसकी जरूरत हो।

9. आसपास की असली आवाज भी अलग से रिकॉर्ड करें।

10. एडिटिंग में केवल वही शॉट रखें जो आपकी कहानी को आगे बढ़ाता है।

और अंत में …

यात्रा के दौरान वीडियो शूटिंग करना बहुत ही मज़ेदार और अपनी यात्रा की कीमती यादों को सहेज कर रखने का एक शानदार तरीका है।

आप यह नहीं चाहेंगे कि कुछ तरीकों का ज्ञान न होने से आपकी यात्रा वीडियो बहुत ही साधारण हो जाये।

ऊपर बताये गए टिप्स का प्रयोग कर और उनका निरंतर अभ्यास कर आप भी अपने टूर का एक बेहतरीन वीडियो बना सकते हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि किसी नयी सेटिंग को यात्रा के बीच पहली बार न आजमाएं।

घर पर थोड़ा अभ्यास करें और अपने फोन की ताकत और कमजोरी समझें। फिर यात्रा में बार-बार सेटिंग देखने के बजाय अपनी कहानी पर ध्यान दें।

और हाँ, हर शॉट का तकनीकी रूप से एकदम सही होना भी जरूरी नहीं है।

कई बार थोड़ा हिला हुआ वही छोटा-सा वीडियो सबसे कीमती बन जाता है जिसमें आपकी यात्रा का कोई असली और दोबारा न मिलने वाला पल कैद हो गया हो।

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5 thoughts on “मोबाइल से बेहतर ट्रैवल वीडियो कैसे शूट करें? आसान गाइड”

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